राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF)
Asked 2 months ago · Viewed 16 times
बुद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली और उसकी प्रमुख विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में मठों (Monasteries) और विहारों में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या' (Pravrajya) संस्कार कराया जाता था, जो लगभग 8 वर्ष की आयु में होता था, जिसके बाद छात्र 'सामणेर' (Novice) कहलाता था।
- 2. बौद्ध काल में उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद लगभग 20 वर्ष की आयु में 'उपनपसंदा' (Upasampada) संस्कार संपन्न होता था, जिसके उपरांत छात्र पूर्ण भिक्षु (Bhikkhu) बनता था और संघ की सदस्यता प्राप्त करता था।
- 3. बौद्ध शिक्षा का माध्यम पूरी तरह से पाली और अन्य लोक भाषाएं थीं, और इस प्रणाली में वर्ण व्यवस्था या जातिगत भेदभाव को पूर्ण स्थान दिया गया था, जिसके कारण शूद्रों और महिलाओं का प्रवेश वर्जित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 और 2 सही हैं। बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में मठों और विहारों में प्रवेश के लिए लगभग 8 वर्ष की आयु में 'प्रव्रज्या' संस्कार होता था, जिसके बाद छात्र को 'सामणेर' कहा जाता था। इसके पश्चात लगभग 20 वर्ष की आयु में उच्च शिक्षा पूर्ण होने पर 'उपनपसंदा' (Upasampada) संस्कार होता था, जिससे व्यक्ति पूर्ण भिक्षु बनता था। कथन 3 गलत है क्योंकि बौद्ध शिक्षा प्रणाली वर्ण व्यवस्था और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध थी, और इसमें बिना किसी भेदभाव के सभी जातियों, शूद्रों तथा बाद में महिलाओं (भिक्षुणियों) को भी प्रवेश की अनुमति दी गई थी। शिक्षा का माध्यम जनसामान्य की भाषा (पाली और प्राकृत) थी।
अगला प्रश्न →
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध-वैदिक कालीन शिक्षा के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में…
Related Questions
→
पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के दिशा-निर्देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. NCF 2005 के अनुसार प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन को एक पृथक विषय के रूप में पढ़ाने के बजाय 'परिवार और मित्र', 'आश्रय', 'जल', 'भोजन', 'यात्रा' और 'हम चीजें कैसे बनाते हैं' जैसी छह अंतर्संबंधित थीमों (Themes) के अंतर्गत एकीकृत रूप में पढ़ाया जाना चाहिए।
2. पर्यावरण अध्ययन के शिक्षण में 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) के अंतर्गत बच्चों के पोर्टफोलियो, सहपाठियों के आकलन, अवधारणा मानचित्रण (Concept Mapping) और गुणात्मक टिप्पणियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल योगात्मक परीक्षाओं को।
3. पर्यावरण अध्ययन की पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक तकनीकों और स्वदेशी समुदायों के अनुभवों को स्थान देना आवश्यक है ताकि बच्चे अपने परिवेश से जुड़कर 'करके सीखने' (Learning by Doing) के सिद्धांत को आत्मसात कर सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) की अवधारणा और बाल-केन्द्रित शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों (चाहे वे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक रूप से किसी भी वर्ग के हों) को एक साथ समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, जिसमें किसी भी प्रकार के अलगाव या भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता है।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21-A छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाता है, जो समावेशी शिक्षा के विधिक आधार को मजबूत करता है।
3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) के अनुसार, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए पृथक विशेष विद्यालयों की स्थापना करना ही समावेशी शिक्षा का एकमात्र और सर्वोत्तम मार्ग है, ताकि वे सामान्य बच्चों के दबाव से बच सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) के संदर्भ में, गणित शिक्षण के मुख्य उद्देश्यों और 'गणितीकृतीकरण' (Mathematization of Child's Thought) की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. NCF-2005 के अनुसार गणित शिक्षण का उच्च उद्देश्य बच्चे की वैचारिक प्रक्रियाओं को परिष्कृत करना और उसे तार्किक रूप से सोचने तथा समस्याओं का समाधान करने के लिए अमूर्त चिंतन की क्षमता विकसित करना है, न कि केवल संख्यात्मक गणनाओं में पारंगत करना।
2. 'गणितीकृतीकरण' का तात्पर्य बालक को केवल गणितीय सूत्र और कलन विधि (Algorithms) रटाना है, ताकि वह व्यावसायिक परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त कर सके।
3. NCF इस बात पर जोर देता है कि गणित का पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जो बच्चों को दैनिक जीवन की वास्तविक समस्याओं से जोड़ सके और उन्हें अपने विचारों को सटीक रूप से व्यक्त करने की भाषा प्रदान कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन (EVS) की कक्षा में 'राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा' (NCF 2005) के मार्गदर्शन और उपागम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन को एक स्वतंत्र विषय के रूप में कक्षा 1 और 2 से ही पढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की अवधारणाओं को एकीकृत किया गया हो।
2. NCF 2005 के अनुसार EVS का पाठ्यक्रम छह प्रमुख थीमों (Themes) पर आधारित है: परिवार और मित्र, भोजन, पानी, आश्रय, यात्रा, और 'हम चीजें कैसे बनाते हैं'।
3. यह विषय बच्चों के स्थानीय परिवेश और वास्तविक जीवन के अनुभवों को विद्यालय के ज्ञान से जोड़ने पर बल देता है, जिससे रटने की प्रवृत्ति से मुक्ति मिल सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
किस मूल्यांकन में पाठ्यचर्या के अंतिम प्रभावों का मूल्यांकन उसके घोषित उद्देश्यों के आधार पर किया जाता है?
→
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चे की गणितीयकरण की क्षमता का विकास करना है। इस संदर्भ में 'गणित का गणितीयकरण' करने से क्या तात्पर्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.