त्वरित लिंक्स
Indian Polity
9 views
राज्यसभा में राज्यों को प्रतिनिधित्व किस आधार पर मिलता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जनसंख्या के आधार पर सीटों का आवंटन होता है।
Related Questions
→
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, स्वतंत्रता और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 323 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग अपने कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग अपनी रिपोर्ट संबंधित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है जिसे राज्यपाल राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों या अध्यक्ष को उनकी पदावधि की समाप्ति से पहले केवल दुराचार (Misbehaviour) या दिवालिया होने के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, किंतु दुराचार के मामले में राष्ट्रपति के आदेश से पूर्व उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच कराया जाना अनिवार्य होता है, और उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह आयोग के अध्यक्ष या सदस्य पर पूरी तरह बाध्यकारी होती है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल राज्यपाल द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है, क्योंकि उनकी नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, यद्यपि उनके निष्कासन के आधार वही होते हैं जो संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (Articles 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन के लिए संसद में कोई भी विधेयक प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की संस्वीकृति अनिवार्य है, और राष्ट्रपति के लिए यह आवश्यक है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, भले ही उस राज्य विधानमंडल का मत राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी न हो।
2. संविधान का अनुच्छेद 4 यह स्पष्ट रूप से उपबंधित करता है कि अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना तथा मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन के लिए बनाई गई विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसी विधियाँ संसद द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) और आधे राज्यों के अनुसमर्थन से ही पारित की जा सकती हैं।
3. भारत द्वारा किसी विदेशी क्षेत्र का अधिग्रहण करने और उसे भारतीय संघ में शामिल करने के लिए संविधान में संशोधन (अनुच्छेद 368 के तहत) करना अनिवार्य होता है, जबकि किसी भारतीय क्षेत्र को विदेशी राज्य को सौंपने (Cession of territory to a foreign country) का कार्य केवल एक साधारण विधायी प्रक्रिया (Ordinary Legislative Process) के माध्यम से कार्यपालिका के कार्यकारी आदेश द्वारा किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श रूसी क्रांति (1917) से लिए गए हैं।
2. बेरुबारी यूनियन वाद (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है, इसलिए इसमें संशोधन नहीं किया जा सकता; किंतु केशवानंद भारती वाद (1973) में इस निर्णय को पलटते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है।
3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा यह गैर-न्यायिक (Non-justiciable) है, जिसका अर्थ है कि इसके प्रावधानों को अदालतों में लागू नहीं कराया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल क्या है?
→
नगरपालिका का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.