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Indian Polity
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नगरपालिका का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
नगरपालिका का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और भारतीय संघवाद की प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है, न कि 'राज्यों का फेडरेशन' (Federation of States), क्योंकि यह संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का कोई अधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद को किसी भी राज्य के क्षेत्र को बढ़ाने, घटाने, नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रकार का कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है, साथ ही राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह संबंधित राज्य के विधानमंडल की राय जानने के लिए विधेयक को उसके पास भेजे और राज्य द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में यह स्पष्ट किया गया था कि भारतीय भू-भाग के किसी हिस्से को किसी अन्य देश को सौंपने (Cede) के लिए अनुच्छेद 3 के तहत साधारण बहुमत से संसद में कानून बनाना पर्याप्त है, और इसके लिए किसी संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, स्वतंत्रता और उनके क्षेत्राधिकार के विस्तार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 320 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग का यह कर्तव्य है कि वह संघ की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षा आयोजित करे, तथा किसी राज्य के राज्यपाल के अनुरोध पर राष्ट्रपति के अनुमोदन से वह उस राज्य की सभी या किन्हीं ऐसी सेवाओं के लिए जिन्हें विशेष योग्यताबद्ध व्यक्तियों की आवश्यकता है, संयुक्त भर्ती के लिए प्रसंविदाओं (Joint Recruitment) में सहायता कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधियों के माध्यम से क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे को बढ़ाया जा सकता है, किंतु राज्य लोक सेवा आयोग के कृत्यों का विस्तार किसी भी परिस्थिति में राज्यपाल के पूर्व अनुमोदन से राज्य के अधीन किसी भी स्थानीय प्राधिकारी या अन्य निगमित निकाय (Corporate Body) या सार्वजनिक संस्था के मामलों तक नहीं किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 323 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग अपने द्वारा किए गए कार्यों की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, और इस रिपोर्ट में आयोग उन मामलों का भी विवरण देता है जिनमें आयोग की सलाह को अस्वीकार कर दिया गया था, तथा अस्वीकृति के कारणों का भी उल्लेख किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के राष्ट्रपति की शक्तियों और उनके संवैधानिक क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को क्षमादान की जो शक्ति प्रदान की गई है, उसके तहत मृत्युदंड के मामले में केवल राष्ट्रपति को ही पूर्ण क्षमा (Pardon) देने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल को राज्य सूची के विषयों पर भी मृत्युदंड के मामले में क्षमादान देने की कोई संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तारित है, और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित प्रत्येक अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत होने पर दोनों सदनों के समक्ष रखना अनिवार्य होता है, तथा यदि संसद उस अध्यादेश को बिना अनुमोदन के अस्वीकृत करने वाला संकल्प पारित कर देती है, तो वह संसद के पुनः समवेत होने के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है।
3. 'कीहर सिंह बनाम भारत संघ वाद' और 'शत्रुघ्न चौहान बनाम भारत संघ वाद' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया है कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 72 के अंतर्गत दया याचिकाओं पर लिए गए निर्णयों की न्यायिक समीक्षा पूरी तरह से वर्जित है और इसके किसी भी आदेश को किसी भी आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
4. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि विधि या तथ्य का कोई ऐसा सार्वजनिक महत्व का प्रश्न उत्पन्न होता है जिस पर राष्ट्रपति राय मांगता है, तो उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है, तथा राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए भी पूर्णतः बाध्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह निर्देश उन विशिष्ट नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है जिन्हें मूल संविधान में नहीं जोड़ा गया था, बल्कि बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
2. अनुच्छेद 45 में मूल रूप से यह प्रावधान था कि राज्य इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेगा, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित करके प्रारंभिक शिक्षा को अनुच्छेद 21क के तहत एक मौलिक अधिकार बना दिया गया।
3. अनुच्छेद 50 के अंतर्गत राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक् करने के लिए राज्य कदम उठाएगा, और यह सिद्धांत शक्ति के पृथक्करण (Separation of Powers) के प्रशासनिक दर्शन पर आधारित है जो देश की शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) को संसद के किस सदन में बोलने का अधिकार है?
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