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जीन पियाजे
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage: लगभग 2 से 7 वर्ष) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अवस्था में बालकों में 'जीववाद' (Animism) की प्रवृत्ति पाई जाती है, जिसके तहत वे निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौने, गुड़िया या बादल) को भी सजीव मानकर उनमें मानवीय भावनाएं और चेतना होने की कल्पना करते हैं।
  2. 2. बालक 'अहमकेंद्रिता' (Egocentrism) से ग्रसित होता है, जिसका अर्थ है कि वह केवल अपने दृष्टिकोण से ही दुनिया को देखता है और यह मान कर चलता है कि दूसरे लोग भी ठीक वैसे ही सोचते और महसूस करते हैं जैसा वह स्वयं करता है।
  3. 3. इस चरण के दौरान बालकों में 'पलटावी गुण' या उत्क्रमणीयता (Reversibility) की पूर्ण क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे वे आसानी से यह समझ लेते हैं कि यदि पानी को बर्फ में बदला जा सकता है, तो बर्फ को पुनः पानी में भी परिवर्तित किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) लगभग 2 से 7 वर्ष तक की आयु होती है। इस अवस्था की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  1. जीववाद (Animism): इस उम्र के बच्चे निर्जीव वस्तुओं को भी सजीव मानते हैं (जैसे यह सोचना कि गुड़िया को भी भूख लगती है)। कथन 1 बिल्कुल सही है।
  2. अहमकेंद्रिता (Egocentrism): बच्चा यह समझ पाने में असमर्थ होता है कि दूसरे व्यक्ति का दृष्टिकोण उससे अलग हो सकता है। वह संसार को केवल अपने दृष्टिकोण से देखता है। कथन 2 भी सही है।
  3. उत्क्रमणीयता का अभाव (Lack of Reversibility): पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बालकों में 'पलटावी गुण' (Reversibility) यानी मानसिक रूप से किसी प्रक्रिया को उल्टा चलाने की क्षमता का अभाव होता है। वे यह नहीं समझ पाते कि यदि 2 + 3 = 5 होता है, तो 5 - 3 = 2 भी होगा। अतः कथन 3 गलत है क्योंकि उत्क्रमणीयता का गुण इस अवस्था में नहीं, बल्कि इसके बाद की 'मूर्त्त संक्रियात्मक अवस्था' (7 से 11 वर्ष) में विकसित होता है।

इसलिए, केवल कथन 1 और 2 सही हैं।

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