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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अंतर्गत 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement, 1920-22) और उससे जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नागपुर के दिसंबर 1920 के वार्षिक अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अनुमोदित और पारित किया गया था, जिसका नेतृत्व चित्तरंजन दास ने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करके किया था।
  2. 2. आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) की हिंसक घटना 4 फरवरी 1922 को हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप महात्मा गांधी ने अत्यधिक क्षुब्ध होकर बारदोली में कांग्रेस की बैठक में इस आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा की थी।
  3. 3. असहयोग आंदोलन के स्थगन के निर्णय से क्षुब्ध होकर चित्रंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर वर्ष 1923 में 'स्वराज पार्टी' (Swaraj Party) की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य परिषदों के भीतर प्रवेश करके सरकार की नीतियों में बाधा डालना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में असहयोग का प्रस्ताव लाल लाजपत राय की अध्यक्षता में लाया गया था, जबकि नागपुर (दिसंबर 1920) के वार्षिक अधिवेशन में चित्तरंजन दास (C.R. Das) ने स्वयं असहयोग का मुख्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया था जिसे भारी बहुमत से पारित किया गया। 2. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर 4 फरवरी 1922 को गुस्साई भीड़ ने थाने में आग लगा दी थी जिससे 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे। इससे आहत होकर गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में आंदोलन वापस ले लिया। 3. आंदोलन के अचानक स्थगन से देश के कई नेता निराश हुए, जिसके परिणामस्वरूप चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने जनवरी 1923 में 'कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी' की स्थापना की।
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