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उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि प्रणालियों के संदर्भ में, 'गंगा-यमुना दोआब' क्षेत्र में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा (Khadar Soil) और इसकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. खादर मृदा को स्थानीय भाषा में 'नयी जलोढ़' या 'कच्छ' मृदा भी कहा जाता है, जिसका निर्माण प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान नदियों द्वारा लाई जाने वाली नई उपजाऊ गाद (Silt) के निक्षेपण से होता है।
  2. 2. इस मृदा में चूने, पोटाश और मैग्नीशियम की प्रचुरता पाई जाती है, जबकि इसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस (Humus) की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जिसके कारण इसमें धान, गेहूँ और गन्ने की फसलें अत्यधिक मात्रा में पैदा होती हैं।
  3. 3. यह मृदा उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी क्षेत्रों (जैसे झाँसी, महोबा और ललितपुर) में सबसे अधिक क्षेत्रफल में विस्तृत है, जहाँ यह कठोर चट्टानों के अपक्षय (Weathering) के परिणामस्वरूप बनती है और इसमें जल धारण करने की क्षमता शून्य होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि खादर मृदा का निर्माण प्रतिवर्ष बाढ़ के समय नदियों द्वारा लाई जाने वाली नई उपजाऊ गाद (निक्षेप) से होता है, इसलिए इसे नवीन जलोढ़ मृदा भी कहते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि इस मृदा में चूना, पोटाश एवं मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होते हैं तथा नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी होती है, जो उत्तर प्रदेश के दोआब क्षेत्र में धान, गेहूँ और गन्ने के लिए अत्यंत उपजाऊ है। कथन 3 गलत है क्योंकि खादर मृदा दक्षिणी पठारी क्षेत्रों में नहीं बल्कि नदियों के बाढ़ वाले मैदानी और दोआब क्षेत्रों में पाई जाती है; दक्षिणी पठारी क्षेत्रों में मुख्य रूप से लाल मृदा, मार और काबर मृदा का विस्तार पाया जाता है।
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