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विकास के प्रमुख सिद्धांतकार सभी देखें (1928) जीन पियाजे519 लेव वाइगोत्स्की403 लॉरेंस कोहलबर्ग19 एरिक एरिक्सन37 जेरोम ब्रूनर76 अल्बर्ट बंडूरा134 सिगमंड फ्रायड278 मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद406 अन्य सिद्धांतकार (गेसेल, ब्रोनफेनब्रेनर, हॉल, आदि)56
अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
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भाषा शिक्षण शास्त्र सभी देखें (45) भाषा अर्जन एवं भाषा अधिगम21 भाषा कौशल (LSRW)13 बहुभाषिकता एवं मातृभाषा3 हिंदी शिक्षण5 अंग्रेजी शिक्षण (English Pedagogy)3
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में 'लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की अवस्थाओं और उनके विशिष्ट लक्षणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोहलबर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional Level) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से बाहरी पुरस्कारों, दंड के भय और व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करने (Instrumental Relativist Orientation) पर आधारित होता है, जहाँ नैतिकता का निर्धारण बाहरी परिणामों से होता है।
  2. 2. 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level) के अंतर्गत किशोर या व्यक्ति समाज के नियमों, परंपराओं, और दूसरों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने तथा 'अच्छा लड़का/अच्छी लड़की' बनने एवं 'कानून और व्यवस्था बनाए रखने' के माध्यम से नैतिकता तय करता है।
  3. 3. 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional Level) की अंतिम अवस्था में व्यक्ति पूर्णतः रूढ़िवादी सामाजिक नियमों और कानूनों को ही अंतिम और अपरिवर्तनीय सत्य मानता है, तथा सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के लिए समाज के किसी भी कानून का उल्लंघन करने का विरोध करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (लगभग 4 से 10 वर्ष) में बालक की नैतिकता बाहरी नियंत्रण के अधीन होती है, जिसमें दंड से बचना और आज्ञापालन तथा अपने स्वार्थ या आदान-प्रदान की भावना (साधन-साध्य अभिविन्यास) मुख्य होती है। कथन 2 सही है: 'पारंपरिक स्तर' (लगभग 10 से 13 वर्ष) में व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था, अधिकार, और दूसरों के अनुमोदन (अच्छा लड़का/लड़की) तथा कानून और व्यवस्था बनाए रखने की अवस्था के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है। कथन 3 गलत है: 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional Level) में व्यक्ति समाज के पारंपरिक और रूढ़िवादी कानूनों से ऊपर उठकर 'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों' (Universal Ethical Principles Orientation) के आधार पर निर्णय लेता है। इस स्तर की उच्चतम अवस्था में व्यक्ति समाज के उन अन्यायपूर्ण कानूनों का भी विरोध कर सकता है जो मानवीय अधिकारों या न्याय के विरुद्ध होते हैं, न कि उन्हें अपरिवर्तनीय सत्य मानता है।
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→ लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? → कोहलबर्ग के अनुसार, सही और गलत के प्रश्न के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को क्या कहा जाता है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों के संदर्भ में, यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि नियमों और कानूनों का पालन केवल इसलिए किया जाना चाहिए ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का सामाजिक विघटन न हो, तो कोहलबर्ग के किस स्तर और चरण का यह सबसे सटीक प्रतिनिधित्व करता है? → कोहलबर्ग के अनुसार, बच्चा किस अवस्था में दंड से बचने के लिए नियमों का पालन करता है? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है। 2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों। 3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत 'लॉरेंस कोहलबर्ग' (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोहलबर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) स्तर के अंतर्गत आने वाली पहली अवस्था 'ज्ञानेन्द्रिय-प्रेरक अवस्था' (Sensory-Motor Stage) कहलाती है, जिसमें बालक दूसरों के तर्कों को सुने बिना केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है। 2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) स्तर के अंतर्गत 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Boy-Good Girl) अभिविन्यास और 'कानून एवं व्यवस्था' (Law and Order) अभिविन्यास शामिल हैं, जहाँ व्यक्ति सामाजिक नियमों, अधिकार और समाज की स्वीकृत परंपराओं को बनाए रखने को ही सर्वोच्च नैतिकता मानता है। 3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) स्तर की अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) है, जिसमें व्यक्ति व्यक्तिगत विवेक और आंतरिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही वे नियम या कानून समाज के मौजूदा प्रावधानों या कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके चरणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले सामाजिक अनुबंधन और व्यक्तिगत अधिकार चरण (Stage 5) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम समाज की भलाई के लिए बनाए गए हैं, और यदि कोई नियम मानवाधिकारों या समाज के कल्याण के विरुद्ध हो, तो उसे बदला जा सकता है। 2. रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Conventional Morality) के अंतर्गत 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' अभिविन्यास (Stage 3) में बालक का मुख्य उद्देश्य दूसरों द्वारा अनुमोदित होना, प्रशंसा प्राप्त करना और सामाजिक मानदंडों के अनुरूप व्यवहार करना होता है। 3. पूर्व-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Pre-conventional Morality) के पहले चरण यानी 'दण्ड एवं आज्ञापालन अभिविन्यास' (Stage 1) में बालक का नैतिक निर्णय इस बात पर आधारित होता है कि कार्य करने से उसे पुरस्कार मिलेगा या शारीरिक दंड, तथा अधिकार या सत्ता रखने वाले व्यक्ति के भय से वह नियमों का पालन करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास की प्रक्रिया आयु के साथ क्रमिक रूप से तीन मुख्य स्तरों (Levels) और प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाओं (Stages) यानी कुल छह चरणों में विभाजित है, और यह विकास सार्वभौमिक होता है। 2. 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण में व्यक्ति कानून को एक कठोर और अपरिवर्तनीय नियम के रूप में देखता है, जहाँ कानून का पालन करना ही एकमात्र परम नैतिकता है, भले ही वह सामाजिक कल्याण के विरुद्ध हो। 3. कोहलबर्ग ने अपने सिद्धांत के प्रतिपादन के लिए 'हाइन्ज़ दुविधा' (Heinz Dilemma) का उपयोग किया था, जिसके माध्यम से उन्होंने बालकों और वयस्कों के तार्किकीकरण (Reasoning) का अध्ययन किया कि वे नैतिक दुविधा की स्थिति में किस प्रकार निर्णय लेते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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