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विषय शिक्षण शास्त्र सभी देखें (57) गणित शिक्षण4 पर्यावरण अध्ययन (EVS) शिक्षण47 विज्ञान शिक्षण2 सामाजिक विज्ञान शिक्षण4

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और चरणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोहलबर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) स्तर के अंतर्गत आने वाले दूसरे चरण (व्यक्तिगत पुरस्कार और आत्म-रुचि उन्मुखीकरण) में बालक का नैतिक निर्णय इस बात पर आधारित होता है कि किस कार्य से उसकी अपनी आवश्यकताएं पूरी होती हैं और उसे क्या प्रत्यक्ष लाभ या पुरस्कार मिलता है।
  2. 2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) स्तर के चौथे चरण (कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण) में व्यक्ति का नैतिक दृष्टिकोण समाज के नियमों, अधिकारों और सामाजिक अनुबंध के लचीलेपन पर आधारित होता है, जहाँ वह मानता है कि यदि कोई कानून समाज के हितों के अनुकूल न हो तो उसे बदला जा सकता है।
  3. 3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) स्तर के छठे चरण (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखीकरण) में व्यक्ति अपने व्यक्तिगत विवेक के आधार पर न्याय, मानवाधिकार और समानता के सार्वभौमिक सिद्धांतों का पालन करता है, भले ही वे सामाजिक कानूनों या समझौतों के विरुद्ध क्यों न हों।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के पहले स्तर 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (लगभग 4 से 10 वर्ष) के दूसरे चरण को 'सापेक्षवादी, इंस्ट्रुमेंटल उद्देश्य या व्यक्तिगत पुरस्कार और आत्म-रुचि उन्मुखीकरण' (Instrumental Relativist Orientation) कहा जाता है। इस चरण में बालक 'जैसी करनी वैसी भरनी' या 'एक हाथ दे दूसरे हाथ ले' की भावना से प्रेरित होकर कार्य करता है, जहाँ उसके लिए वही नैतिक है जिससे उसकी अपनी आवश्यकताएं पूरी हों।
कथन 2 गलत है: पारंपरिक नैतिकता स्तर के चौथे चरण को 'कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण' (Law and Order Orientation) कहा जाता है। इस चरण में व्यक्ति यह मानता है कि नियमों और कानूनों का पालन करना समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए परम आवश्यक है, और वह कानूनों को अटूट और अपरिवर्तनीय मानता है। कानूनों के लचीलेपन और सामाजिक अनुबंध की बात कोहलबर्ग के पांचवें चरण (सामाजिक अनुबंध उन्मुखीकरण) में आती है, चौथे चरण में नहीं।
कथन 3 सही है: उत्तर-पारंपरिक नैतिकता स्तर के छठे चरण को 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण उन्मुखीकरण' (Universal Ethical Principle Orientation) कहा जाता है। इस उच्चतम स्तर पर व्यक्ति बाहरी दबाव या कानूनों की परवाह किए बिना अपने स्वयं के विकसित किए गए न्याय, मानव अधिकारों और अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है।

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→ लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? → कोहलबर्ग के अनुसार, सही और गलत के प्रश्न के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को क्या कहा जाता है? → लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों के संदर्भ में, यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि नियमों और कानूनों का पालन केवल इसलिए किया जाना चाहिए ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का सामाजिक विघटन न हो, तो कोहलबर्ग के किस स्तर और चरण का यह सबसे सटीक प्रतिनिधित्व करता है? → कोहलबर्ग के अनुसार, बच्चा किस अवस्था में दंड से बचने के लिए नियमों का पालन करता है? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में 'लॉरेंस कोहलवर्ग' (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) और इसकी विभिन्न अवस्थाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोहलवर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional Level) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से बाह्य दंड, पुरस्कार और आज्ञापालन पर आधारित होता है, जिसमें 'सापेक्षवादी उन्मुखीकरण' के तहत बच्चा यह समझता है कि जैसे को तैसा या व्यक्तिगत आवश्यकताएँ ही नियम तय करती हैं। 2. 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level) के भीतर 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की उन्मुखीकरण' (Good Boy-Good Girl Orientation) और 'कानून एवं व्यवस्था उन्मुखीकरण' (Law and Order Orientation) आते हैं, जहाँ व्यक्ति समाज की अपेक्षाओं, सामाजिक मानदंडों और नियमों को बनाए रखने को ही सर्वोच्च नैतिकता मानता है। 3. 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional Level) में नैतिकता पूरी तरह से बाहरी कानूनों और सामाजिक दबावों से नियंत्रित होती है, और इस स्तर पर पहुँचने वाला व्यक्ति कभी भी व्यक्तिगत विवेक या सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को कानून से ऊपर नहीं रख सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है। 2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों। 3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास की प्रक्रिया आयु के साथ क्रमिक रूप से तीन मुख्य स्तरों (Levels) और प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाओं (Stages) यानी कुल छह चरणों में विभाजित है, और यह विकास सार्वभौमिक होता है। 2. 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण में व्यक्ति कानून को एक कठोर और अपरिवर्तनीय नियम के रूप में देखता है, जहाँ कानून का पालन करना ही एकमात्र परम नैतिकता है, भले ही वह सामाजिक कल्याण के विरुद्ध हो। 3. कोहलबर्ग ने अपने सिद्धांत के प्रतिपादन के लिए 'हाइन्ज़ दुविधा' (Heinz Dilemma) का उपयोग किया था, जिसके माध्यम से उन्होंने बालकों और वयस्कों के तार्किकीकरण (Reasoning) का अध्ययन किया कि वे नैतिक दुविधा की स्थिति में किस प्रकार निर्णय लेते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोहलवर्ग के सिद्धांत की 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Level) की अंतिम अवस्था में व्यक्ति अपने व्यक्तिगत नैतिक सिद्धांतों और सार्वभौमिक न्याय के ऐसे अंतःकरण पर आधारित होता है, जो समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर हो सकते हैं (जैसे- महात्मा गांधी या मार्टिन लूथर किंग जूनियर का दृष्टिकोण)। 2. इस सिद्धांत की आलोचना करते हुए प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) ने तर्क दिया कि कोहलवर्ग का यह मॉडल मुख्य रूप से पुरुषों के नैतिक विकास पर आधारित है और यह महिलाओं में पाए जाने वाले 'देखभाल और संबंधों की नैतिकता' (Morality of Care) की उपेक्षा करता है। 3. कोहलवर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की सभी अवस्थाएँ सार्वभौमिक और परिवर्तनशील होती हैं, जिन्हें संस्कृति और पर्यावरण के प्रभाव से आसानी से बदला या उलट-पलट (Reversed) जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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