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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) शिक्षण के अंतर्गत प्राचीन भारतीय इतिहास के 'मौर्य साम्राज्य' (Mauryan Empire) और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्य प्रशासन में 'अर्थशास्त्र' के अनुसार सर्वोच्च नागरिक और आपराधिक न्यायालयों के न्यायधीशों को क्रमशः 'धर्मस्थीय' (दीवानी न्यायालय) और 'कंटकशोधन' (फौजदारी न्यायालय) कहा जाता था, जहाँ 'कंटकशोधन' न्यायालय मुख्य रूप से समाज के असामाजिक तत्वों और अपराधियों से जनता की रक्षा करने के लिए स्थापित किए गए थे।
  2. 2. अशोक के शिलालेखों और अभिलेखों में साम्राज्य के विभिन्न प्रंतों (चक्रों) का उल्लेख मिलता है, जैसे कि तक्षशिला (उत्तरापथ), उज्जैनी (अवंतीपथ), और तोसलि (कलिंग), जिनके प्रशासनिक प्रमुख सामान्यतः शाही परिवार के राजकुमार या 'आर्यपुत्र' होते थे।
  3. 3. मौर्य काल में व्यापारिक मार्गों और यात्रा की सुरक्षा के लिए नियुक्त किए जाने वाले विशेष अधिकारियों को 'महामात्र' कहा जाता था, जबकि नगर प्रशासन का संचालन करने वाले छह समितियों के समूह के प्रमुख अधिकारी को 'समान्हर्ता' कहा जाता था जो संपूर्ण साम्राज्य से कर संग्रह का कार्य संभालता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: मौर्य प्रशासन में कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार दो प्रकार के न्यायालयों का उल्लेख मिलता है - 'धर्मस्थीय' (दीवानी न्यायालय, जो पारिवारिक विवादों और संपत्ति से संबंधित थे) तथा 'कंटकशोधन' (फौजदारी न्यायालय, जो राज्य और नागरिकों के बीच के अपराधों तथा असामाजिक तत्वों का दमन करते थे)। कथन 2 सही है: अशोक के शिलालेखों के अनुसार मौर्य साम्राज्य कई प्रान्तों या 'चक्रों' में विभाजित था, जैसे उत्तरापथ (राजधानी तक्षशिला), अवंतीपथ (उज्जैनी), प्राच्य (पाटलिपुत्र), कलिंग (तोसलि) और दक्षिणापथ (सुवर्णगिरि), जिनके प्रमुख राजकुमार या 'आर्यपुत्र' होते थे। कथन 3 गलत है: नगर प्रशासन का संचालन छह समितियों द्वारा होता था और नगर के प्रमुख अधिकारी को 'नागरिक' कहा जाता था। वहीं, 'समान्हर्ता' (Samahartri) कर संग्रह (Revenue Collection) और आय-व्यय के विवरण का सर्वोच्च अधिकारी होता था, जबकि व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा से संबंधित अधिकारी 'अध्यक्ष' श्रेणी के अंतर्गत आते थे। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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