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Indian Polity
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संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय कौन लेता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दलबदल को छोड़कर राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सलाह पर निर्णय लेते हैं।
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की परिभाषा में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के साथ-साथ अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or usage) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते उनका बल विधि जैसा हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'गोकक बंधु वाद' या 'केशवानंद भारती वाद' जैसे ऐतिहासिक मामलों में यह प्रतिपादित किया है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संवैधानिक संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' की परिभाषा के दायरे में आता है, जिसके कारण संसद किसी भी मूल अधिकार को संविधान संशोधन के माध्यम से समाप्त या सीमित नहीं कर सकती है।
3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, खुफिया संगठनों और दूरसंचार प्रणालियों से जुड़े कर्मियों के मूल अधिकारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से विधि द्वारा निर्बंधन या प्रतिबंध लगा सकती है, और ऐसे कानूनों को केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वे भाग III का उल्लंघन करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान सभा की निर्माण प्रक्रिया और उसकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग लिया था, और इस बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
2. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण के लिए कुल 22 प्रमुख समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी और इसके अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अंबेडकर थे।
3. संविधान के निर्माण में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था, तथा संविधान सभा द्वारा इसके वाचन के दौरान कुल तीन वाचन (Readings) हुए थे, जिसके पश्चात 26 नवंबर 1949 को इसे अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं; और जब लोकसभा द्वारा पारित कोई धन विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है, तो राज्यसभा को उसे अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के लोकसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत वर्णित 'वित्त विधेयक श्रेणी-I' (Financial Bill Category-I) में ऐसे विषय शामिल होते हैं जिनका संबंध अनुच्छेद 110 में उल्लिखित सभी या किसी भी विशिष्ट मामले से होता है, और ऐसे विधेयक को दोनों सदनों में से किसी में भी पुनःस्थापित किया जा सकता है, किंतु इसे राज्यसभा में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश (Prior Recommendation) आवश्यक नहीं होती है, केवल लोकसभा में पारित होने से पहले राष्ट्रपति की अनुमति अनिवार्य होती है।
3. साधारण विधियों या वित्तीय विधेयकों (श्रेणी-I और श्रेणी-II) के पारित होने की प्रक्रिया में उत्पन्न गतिरोध को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का प्रावधान किया गया है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, किंतु धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के मामलों में संयुक्त बैठक बुलाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में प्रयुक्त शब्दावली, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रस्तावना में उल्लिखित 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है, और यह अवधारणा ब्रिटिश राजशाही प्रणाली के विपरीत अमेरिकी संविधान से प्रेरित है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'गोलकनाथ वाद' (1967) में यह अभिनिर्धारित किया गया था कि प्रस्तावना संविधान की मूल आत्मा है और संसद को अनुच्छेद 368 के तहत भी प्रस्तावना में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि यह संविधान का एक अनन्य भाग है जिसमें कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
3. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के विचार को बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते इसके 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाई जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के साथ-साथ राज्यों की पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों का अधीक्षण और संचालन भी करता है।
2. वर्ष 1989 तक निर्वाचन आयोग मुख्य रूप से एक एकल-सदस्यीय निकाय था, किंतु अक्टूबर 1989 में राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 324(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करके इसे बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया, जिसे बाद में 1993 में वैधानिक रूप से स्थायी बहु-सदस्यीय आयोग बना दिया गया।
3. वर्ष 2023 में अधिनियमित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुसार, चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं, और इस समिति की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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