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बाल विकास के क्षेत्र में लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के संदर्भ में, 'मचान या पाड़' (Scaffolding) की अवधारणा निम्नलिखित में से किस शैक्षणिक प्रक्रिया को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करती है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में 'मचान' या 'पाड़' (Scaffolding) उस अस्थायी सहायता या मार्गदर्शन को कहा जाता है जो किसी अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) जैसे शिक्षक, माता-पिता या प्रखर सहपाठी द्वारा शिक्षार्थी को उसकी समस्या समाधान के दौरान दी जाती है। जैसे-जैसे बच्चा स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम होता जाता है, इस सहायता को धीरे-धीरे कम कर दिया जाता है। यह अवधारणा ZPD (Zone of Proximal Development) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और divergent thinking (अपसारी चिंतन)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, जॉय पॉल गिलफर्ड (Joy Paul Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना' (Structure of Intellect Model) के अंतर्गत 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'पोस्टीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Posterior Cingulate Cortex) और 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) के बीच वैचारिक लचीलेपन, मौलिकता, धाराप्रवाहता (Fluency) और रचनात्मक अंतर्दृष्टि की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डी बोनो (Edward de Bono) द्वारा प्रतिपादित 'पार्श्व चिंतन सिद्धांत' (Lateral Thinking Theory) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान आधारित शिक्षाशास्त्र (Problem-based Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, मौलिक विचारों के सृजन व अभिनव दृष्टिकोण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास का सिद्धांत' (Stages of Moral Development) के अंतर्गत 'उत्तरांचल या उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Level) की 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) अवस्था के न्यूरो-संज्ञानात्मक व दार्शनिक स्वरूप, तथा कैरल गिलगन (Carol Gilligan) द्वारा प्रतिपादित 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) के सिद्धांत के अंतर्गत 'जवाबदेही, संबंधपरक नैतिकता और न्याय बनाम देखभाल के परिप्रेक्ष्य' के वैज्ञानिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मूल्य-आधारित शिक्षा और विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण व मानवीय संवेदनाओं के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia - गणितीय और संख्यात्मक प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सल्カス' (Intraparietal Sulcus - IPS), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'वेंट्रल ऑसिपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' के बीच संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण (Numerical Magnitude Processing), स्थानिक-संख्यात्मक मानचित्रण (Spatial-Numerical Association), और कार्यशील स्मृति एकीकरण की सक्रियण विफलता तथा दोषपूर्ण तंत्रिका नेटवर्क (Neural Disconnectivity) की गतिकी, तथा चार्ल्स स्पीयरमैन और अन्य न्यूरोलॉजिकल शोधों के ऐतिहासिक प्रत्यय और आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्कैल्कुलिया ऑप्टिमाइज्ड रेमेडियल पेडागोजी' (Neuro-Dyscalculia Optimized Remedial Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी गणितीय रणनीतियों (Multisensory Numeracy Interventions), संख्या बोध (Number Sense) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सामाजिक अध्ययन' के अंतर्गत 'प्राचीन भारतीय राजनीतिक विचार और मौर्य प्रशासन' के संदर्भ में, कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र' में वर्णित 'सप्तांग सिद्धांत' (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दानी/बल, और मित्र) की प्रशासनिक संरचना तथा मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में 'तीर्थ' (प्रमुख 18 महामात्य या उच्चाधिकारी) और 'अध्यक्ष' (आर्थिक व वाणिज्यिक विभागों के नियंत्रक, जैसे सीताध्यक्ष, पानाध्यक्ष, और लक्षणाध्यक्ष) के वैधानिक, प्रबंधकीय और राजनैतिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास कोई निरंतर चलने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह गुणात्मक रूप से भिन्न चार क्रमिक अवस्थाओं (चरणों) के माध्यम से होती है, जिसमें प्रत्येक अवस्था पूर्वगामी अवस्था का पुनर्निर्माण करती है।
2. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता पूर्ण रूप से विकसित हो जाती है, जिससे वे किसी वस्तु के आकार या रूप में परिवर्तन होने के बावजूद उसके मूल गुणों को समझ पाते हैं।
3. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को श्रेणियों या उप-श्रेणियों में वर्गीकृत करने की योग्यता (Classification) और 'क्रमबद्धता' (Seriation) सीख जाते हैं, लेकिन वे अमूर्त और काल्पनिक प्रस्तावनाओं पर तार्किक रूप से विचार करने में असमर्थ होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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