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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities) के विशिष्ट प्रकार 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia - गणितीय और संख्यात्मक प्रसंस्करण अक्षमता) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सल्カス' (Intraparietal Sulcus - IPS), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'वेंट्रल ऑसिपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' के बीच संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण (Numerical Magnitude Processing), स्थानिक-संख्यात्मक मानचित्रण (Spatial-Numerical Association), और कार्यशील स्मृति एकीकरण की सक्रियण विफलता तथा दोषपूर्ण तंत्रिका नेटवर्क (Neural Disconnectivity) की गतिकी, तथा चार्ल्स स्पीयरमैन और अन्य न्यूरोलॉजिकल शोधों के ऐतिहासिक प्रत्यय और आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिस्कैल्कुलिया ऑप्टिमाइज्ड रेमेडियल पेडागोजी' (Neuro-Dyscalculia Optimized Remedial Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी गणितीय रणनीतियों (Multisensory Numeracy Interventions), संख्या बोध (Number Sense) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता है जो संख्याओं को समझने, गणना करने और गणितीय अवधारणाओं को सीखने की क्षमता को प्रभावित करती है। न्यूरो-संज्ञानात्मक और न्यूरो-इमेजिंग अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि डिस्कैल्कुलिया से ग्रसित बच्चों में मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सल्क्स' (Intraparietal Sulcus - IPS) की सक्रियता में महत्वपूर्ण कमी या असामान्यता होती है, जो संख्यात्मक परिमाण (Numerical Magnitude) के प्रसंस्करण के लिए उत्तरदायी है। आधुनिक समावेशी कक्षाओं में इस चुनौती से निपटने के लिए 'न्यूरो-डिस्कैल्कुलिया ऑप्टिमाइज्ड रेमेडियल पेडागोजी' के तहत बहुसंवेदी गणितीय शिक्षण (जैसे मैनिपुलेटिव्स और दृश्य-स्थानिक संख्या रेखा का प्रयोग) का उपयोग किया जाता है ताकि तंत्रिका पथों को पुनर्गठित (Neural Plasticity) किया जा सके।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास के सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Pre-conventional, Conventional, और Post-conventional Levels) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC - नैतिक निर्णय और सहानुभूति), 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - संज्ञानात्मक संघर्ष और सुसंगतता), और 'इंसुला' (Insula - सामाजिक-नैतिक भावनाएं जैसे अपराध बोध और करुणा) के बीच नैतिक तर्क, सामाजिक परिप्रेक्ष्य ग्रहण (Perspective Taking), और कार्यकारी निर्णय की सक्रियण गतिकी, तथा कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) के 'देखभाल के नैतिकता' (Ethics of Care) के दृष्टिकोण के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मॉरल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Moral Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैतिक न्यायशीलता, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाओं और 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. 'टेराकोटा शिल्प' (Terracotta Craft) - गोरखपुर जिला (यह पकी हुई मिट्टी के पारंपरिक कलात्मक खिलौनों और मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है, जिसे जीआई (GI) टैग भी प्राप्त है।) 2. 'बर्तनों और पीतल के हस्तशिल्प' - मुरादाबाद जिला (इसे 'पीतल नगरी' के रूप में जाना जाता है और यहाँ धातु की नक्काशी का कार्य प्रमुखता से होता है।) 3. 'जरी-ज़रदोज़ी कला' - रामपुर जिला (यह पारंपरिक रूप से सोने और चांदी के तारों की कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है, जिसे ओडीओपी योजना के तहत शामिल किया गया है।) 4. 'काष्ठ कला (लकड़ी के खिलौने)' - सहारनपुर जिला (यह लकड़ी की नक्काशी और घरेलू सजावटी वस्तुओं के लिए पूरे देश में विशिष्ट स्थान रखता है।) उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व और उसके आकलन (Personality and Assessment)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हान्स आइजेंक (Hans Eysenck) द्वारा प्रतिपादित 'व्यक्तित्व के त्रि-आयामी सिद्धांत' (3-Factor Model: पदानुक्रमित मॉडल - एक्स्ट्रावर्शन, न्यूरोटिसिज्म, और साइकोटिसिज्म) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'रेटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम' (RAS), 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System - Amygdala and Hippocampus), और 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC) के बीच कोर्टिकल उत्तेजना (Cortical Arousal), autonomic संवेगात्मक प्रतिक्रिया, और आवेग नियंत्रण की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट क्लोकॉन्ज और हेनरी मरे के 'व्यक्तित्व विकास' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-पर्सनालिटी एलाइनमेंट पेडागोजी' (Neuro-Personality Aligned Pedagogy) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक संतुलन, व्यवहारिक अनुकूलनशीलता व समग्र व्यक्तित्व विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'कारक' (Case) और उनके विभक्ति चिह्नों तथा प्रयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'अधिकरण कारक' का विभक्ति चिह्न 'में' और 'पर' होता है, जो क्रिया के आधार, समय या स्थान का बोध कराता है, जैसे 'पे्री पर पक्षी बैठा है' या 'वह कमरे में पढ़ रहा है'। 2. 'अपादान कारक' और 'करण कारक' दोनों का विभक्ति चिह्न 'से' होता है, किंतु करण कारक में जहाँ 'से' साधन या माध्यम का बोध कराता है (जैसे 'वह कलम से लिखता है'), वहीं अपादान कारक में 'से' किसी वस्तु के स्थिर अवस्था से अलग होने, डरने, लजाने या तुलना करने का भाव प्रकट करता है (जैसे 'पेड़ से पत्ता गिरा')। 3. 'संबोधन कारक' के अंतर्गत 'हे', 'अरे', 'अजी' आदि शब्दों का प्रयोग किसी को पुकारने या संबोधित करने के लिए किया जाता है, और इसका व्याकरणिक दृष्टि से वाक्य की क्रिया के साथ सीधा और प्रत्यक्ष संबंध होता है, जिसके कारण इसे मुख्य कारकीय श्रेणियों में अनिवार्य रूप से गिना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'डिसलेक्सिया' (Dyslexia) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'बाएं वेंट्रिकुलर और पेरियाक्वेडक्टल ग्रे एरिया', 'सुपीरियर टेम्पोरल गाइरस' (Superior Temporal Gyrus - Wernicke's Area), और 'ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Visual Word Form Area - VWFA) के बीच phonological awareness विफलता, दृश्य-श्रव्य एकीकरण (Audio-Visual Integration) क्षरण, और शब्द रूप पहचान (Word Form Recognition) की सक्रियण गतिकी, तथा स्टैनिसलास डियाहेन (Stanislas Dehaene) के 'न्यूरोनल रीसाइक्लिंग हाइपोथेसिस' (Neuronal Recycling Hypothesis) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिसलेक्सिया ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Dyslexia Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में ध्वन्यात्मक पठन विधियों (Phonics-based Methods), बहुसंवेदी ऑर्टन-गिलिंगहैम तकनीक व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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