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Indian Polity
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राज्यसभा में राष्ट्रपति कितने सदस्य मनोनीत कर सकते हैं?

Detailed Explanation

राष्ट्रपति 12 सदस्य मनोनीत करते हैं।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह पद धारण करता है जो राष्ट्रपति को उपयुक्त लगे, किंतु महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित वारंट द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 3. सीएजी (CAG) का पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय का पात्र वह व्यक्ति हो सकता है, बशर्ते कि उसने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से विशेष अनुमति प्राप्त कर ली हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? अखिल भारतीय सेवाओं का प्रावधान किस अनुच्छेद में है? भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के खंड (2) के अनुसार राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो भाग-III द्वाराप्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, तथा इस खंड के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अतिरिक्त केवल अध्यादेश, आदेश और उप-विधियाँ ही शामिल हैं, किंतु किसी भी संवैधानिक संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को इस अनुच्छेद के अधीन 'विधि' नहीं माना जा सकता था। 2. उच्चतम न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें मूल अधिकार भी शामिल हैं, बशर्ते वह संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे। 3. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की अनन्य (Exclusive) अधिकारिता प्राप्त है, जिसका अर्थ यह है कि किसी भी मूल अधिकार के हनन की स्थिति में कोई भी व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय की शरण ले सकता है, और उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति केवल तभी प्राप्त होती है जब पीड़ित व्यक्ति पहले उच्च न्यायालय में अपील करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों (विशेषकर 42वें और 44वें संशोधन) तथा आपातकालीन उपबंधों (अनुच्छेद 352 से 360) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में यह प्रावधान जोड़ा गया था कि राष्ट्रपति संपूर्ण भारत में या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है, तथा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को न्यायपालिका में किसी भी आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती थी। 2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी की जा सकती है जब संघ के मंत्रिमंडल (Cabinet) का ऐसा विनिश्चय लिखित रूप में उसे संसूचित (communicate) किया जाए, और आपातकाल की उद्घोषणा का अनुमोदन संसद के दोनों सदनों द्वारा एक माह के भीतर विशेष बहुमत द्वारा किया जाना आवश्यक है। 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु 44वें संशोधन के बाद यह स्पष्ट किया गया कि अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता, और अनुच्छेद 19 के अंतर्गत आपातकाल का निलंबन केवल तभी हो सकता है जब आपातकाल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर घोषित किया गया हो, 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की विधायी, कार्यकारी और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत जब संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कोई विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पास यह शक्ति होती है कि वह अपनी 'निलंबकारी वीटो' (Suspensive Veto) शक्ति का प्रयोग करते हुए विधेयक को संसद के पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, किंतु यदि संसद उस विधेयक को संशोधनों के साथ या बिना संशोधनों के पुनः पारित कर राष्ट्रपति के पास भेज देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अपनी अनुमति देना अनिवार्य होता है, सिवाय उस स्थिति के जब वह धन विधेयक (Money Bill) हो। 2. राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति संसद के दोनों सदनों के सत्र में न होने पर ही प्रयोग की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश संसद की पुनर्बैठक के छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित न होने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, भले ही इस अध्यादेश की अधिकतम अवधि छह महीने से कम क्यों न हो। 3. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Power) के अंतर्गत अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, और मृत्युदंड के मामलों में केवल राष्ट्रपति के पास ही पूर्ण क्षमादान (Pardon) की शक्ति होती है, राज्यपाल के पास नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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