BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
17 views

भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग का आधार क्या है?

Detailed Explanation

संविधान के अतिक्रमण (उल्लंघन) पर महाभियोग चलता है।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में परिवर्तन के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना ही साधारण बहुमत से नया विधेयक संसद में प्रस्तुत कर सकती है। 2. अनुच्छेद 3 के परंतुक के अनुसार, किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम को प्रभावित करने वाला कोई भी विधेयक राष्ट्रपति द्वारा तब तक संसद के किसी भी सदन में पुनरस्थापित नहीं किया जा सकता, जब तक कि राष्ट्रपति ने उस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए न भेज दिया हो, और राज्य विधानमंडल द्वारा तय की गई समयावधि के भीतर उसका मत प्राप्त न हो गया हो। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में यह निर्णय दिया गया था कि भारतीय संघ के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए अनुच्छेद 3 के तहत साधारण बहुमत से सामान्य विधायी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, जिसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की स्थापना एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय के रूप में की गई है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन (संसदीय अधिनियम के विनियमन के अधीन) की जाती है। 2. वर्ष 1993 में संसद द्वारा अधिनियमित संशोधन के पश्चात मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों को समान शक्तियाँ प्राप्त हो गईं तथा निर्वाचन आयोग के भीतर किसी निर्णय पर मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की वैधानिक व्यवस्था की गई है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ (2023)' मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, जब तक संसद इस विषय पर कोई विशिष्ट कानून नहीं बनाती, तब तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलकर बनी एक उच्च-स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की जाएगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उससे संबंधित विभिन्न आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना में 'गणराज्य' (Republic) शब्द का तात्पर्य यह है कि भारत का राज्याध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं होता है, बल्कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए जनता द्वारा निर्वाचित होता है। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में यह स्पष्ट निर्णय दिया गया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है। 3. प्रस्तावना में अभी तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्दों को जोड़ा गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा के निर्वाचन के लिए वर्ष 1946 में हुई चुनाव प्रक्रिया में प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को आवंटित 296 सीटों के लिए हुए चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 208 सीटें और मुस्लिम लीग ने 73 सीटें जीती थीं। 2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और इस बैठक में सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांसिसी परंपरा के अनुरूप सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था, जबकि एच.सी. मुखर्जी को संविधान सभा का उपाध्यक्ष बनाया गया था। 3. संविधान के निर्माण हेतु संविधान सभा द्वारा कुल 22 प्रमुख समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रक्रिया नियम समिति, संचालन समिति और राष्ट्रध्वज संबंधी तदर्थ समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि संघ संविधान समिति और संघीय शक्ति समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 108' के अंतर्गत दोनों सदनों की 'संयुक्त बैठक' (Joint Sitting) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संयुक्त बैठक का प्रावधान केवल 'साधारण विधेयकों' (Ordinary Bills) और 'वित्तीय विधेयकों' (Financial Bills - अनुच्छेद 117) के मामलों में ही लागू होता है, और इसे 'धन विधेयक' (Money Bill) या 'संविधान संशोधन विधेयक' (Constitutional Amendment Bill) के संबंध में आयोजित नहीं किया जा सकता है। 2. यदि किसी विधेयक पर विचार करने और उसे पारित करने में दोनों सदनों के बीच असहमति के कारण छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के अपने आशय को संसूचित कर सकता है। 3. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि वह अनुपस्थित हो, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष इसकी अध्यक्षता करता है; राज्यसभा का सभापति कभी भी इसकी अध्यक्षता नहीं कर सकता क्योंकि वह सदन का सदस्य नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.