BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
6 views

भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा के निर्वाचन के लिए वर्ष 1946 में हुई चुनाव प्रक्रिया में प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को आवंटित 296 सीटों के लिए हुए चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 208 सीटें और मुस्लिम लीग ने 73 सीटें जीती थीं।
  2. 2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और इस बैठक में सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांसिसी परंपरा के अनुरूप सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था, जबकि एच.सी. मुखर्जी को संविधान सभा का उपाध्यक्ष बनाया गया था।
  3. 3. संविधान के निर्माण हेतु संविधान सभा द्वारा कुल 22 प्रमुख समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रक्रिया नियम समिति, संचालन समिति और राष्ट्रध्वज संबंधी तदर्थ समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि संघ संविधान समिति और संघीय शक्ति समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन किया गया था। ब्रिटिश प्रांतों के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस को 208 और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुईं। 9 दिसंबर 1946 को हुई पहली बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष और बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष तथा एच.सी. मुखर्जी एवं वी.टी. कृष्णमाचारी को उपाध्यक्ष चुना गया था। संविधान निर्माण के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया था जिनके अध्यक्षों के नाम और विवरण सत्य हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पोर्टल पर अध्ययन करें।
Share:

Related Questions

राष्ट्रपति को शपथ कौन दिलाता है? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में संसद द्वारा कोई पृथक् कानून बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। 2. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) द्वारा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए एक विशेष प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत उन पर विदेशी अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946) और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के उपबंध लागू नहीं होंगे, बशर्ते उन्होंने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को यह पूर्ण शक्ति प्रदान की गई है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सकेगी, और संसद द्वारा पारित इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए नागरिकता अधिनियम, 1955 अधिनियमित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों तथा राजभाषा के संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषा कर दिया गया है, किंतु अंग्रेजी और राजस्थानी भाषा अभी भी इस अनुसूची में शामिल नहीं हैं। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा से संबंधित विस्तृत प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत अनुच्छेद 343 यह उपबंधित करता है कि संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा। 3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निरर्हता से संबंधित उपबंध करती है, और इसके तहत किसी राजनीतिक दल के विलय (Merger) की स्थिति में कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का दल से अलग होना आवश्यक होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, उनकी शक्तियों तथा कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि वह सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित (Qualified) हो, तथा उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होने के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार होता है, किंतु उसे किसी भी मामले में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता है। 2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा CAG अपने पद पर छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) बने रहते हैं। 3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) केंद्र सरकार के लेखाओं से संबंधित अपनी वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं, जबकि किसी राज्य के लेखाओं से संबंधित उसकी रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को सौंपी जाती है ताकि वह संबंधित राज्य के विधानमंडल में प्रस्तुत की जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) का दर्जा प्राप्त है तथा इसके पास अपनी अवमानना (Contempt of Court) के लिए दंड देने की शक्ति है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.