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Indian Polity
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संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) किस अनुच्छेद में है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार देता है, जिसे डॉ. अंबेडकर ने संविधान की 'आत्मा और हृदय' कहा था।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदनों की बैठकों में कोरम (गणपूर्ति), विधेयकों के पारित होने की प्रक्रिया और विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 189 के अनुसार राज्य विधानसभा या विधान परिषद की बैठक का गठन करने के लिए कोरम सदन के कुल सदस्यों की संख्या का दसवाँ हिस्सा या कम से कम 10 सदस्य (जो भी अधिक हो) होगा, और यदि सदन की बैठक के दौरान कोरम नहीं है, तो पीठासीन अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह सदन को स्थगित कर दे या बैठक को तब तक के लिए निलंबित रखे जब तक कोरम पूरा न हो जाए।
2. अनुच्छेद 197 के प्रावधानों के अनुसार यदि किसी साधारण विधेयक को राज्य की विधानसभा द्वारा पारित करके विधान परिषद में भेजा जाता है, और विधान परिषद उस विधेयक को अस्वीकार कर देती है या ऐसा संशोधन करती है जिसे विधानसभा स्वीकार नहीं करती, या विधान परिषद को विधेयक भेजे जाने की तारीख से तीन महीने की अवधि बीत जाने के बावजूद विधान परिषद द्वारा विधेयक पारित नहीं किया जाता है, तो विधानसभा उस विधेयक को दोबारा पारित करके अपनी विधानसभा के साधारण बहुमत से सीधे राज्यपाल की अनुमति के लिए भेज सकती है।
3. अनुच्छेद 201 के अंतर्गत जब कोई विधेयक राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किए जाने के बाद राज्यपाल के विचार के लिए आरक्षित रखा जाता है, और राष्ट्रपति उसे अपने पास विचारार्थ रखता है, तो राष्ट्रपति राज्यपाल को यह निर्देश दे सकता है कि वह उस विधेयक को राज्य विधानमंडल के सदन या सदनों को पुनर्विचार के लिए लौटा दे, और ऐसे संदेश मिलने के बाद राज्य विधानमंडल को छह महीने की अवधि के भीतर उस विधेयक पर पुनर्विचार करना अनिवार्य होता है, और यदि विधानमंडल संशोधन के साथ या बिना संशोधन के उसे दोबारा पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति देने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 163 के अनुसार, राज्यपाल को अपनी कृत्यों का निर्वहन करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री होगा, तथा यह उपबंध स्पष्ट करता है कि राज्यपाल द्वारा अपने विवेक का प्रयोग करने की शक्ति केवल उन्हीं मामलों तक सीमित है जहाँ संविधान द्वारा या उसके अधीन उसे स्वविवेक से कार्य करने की स्पष्ट छूट दी गई है, और यदि इस बात पर कोई विवाद उत्पन्न होता है कि कोई मामला राज्यपाल के विवेक का विषय है या नहीं, तो राज्यपाल का इस संबंध में किया गया निर्णय अंतिम होगा और किसी भी न्यायालय में उसकी न्यायसमीक्षा (Judicial Review) नहीं की जा सकती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 213 के अधीन राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम का होता है, किंतु राज्यपाल द्वारा ऐसा कोई भी अध्यादेश राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना प्रख्यापित नहीं किया जा सकता यदि उस विषय से संबंधित विधेयक को राज्य विधानसभा में पुनः स्थापित करने के लिए संविधान के अनुसार राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होती।
3. संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है, तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए एक पृथक मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, जिसके प्रभार के अंतर्गत बिहार राज्य को भी 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा शामिल कर लिया गया था, जबकि झारखंड को इस अनिवार्यता से मुक्त रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान संशोधन की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में वर्णित है?
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अनुच्छेद 110 का संबंध?
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति कौन करता है?
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