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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की आवश्यकता—**'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization)**—जिसके तहत व्यक्ति अपनीिक क्षमताओं, प्रतिभाओं और व्यक्तिगत संभावनाओं की पूर्ण प्राप्ति, रचनात्मक अभिव्यक्ति और अपने जीवन के चरम विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभाओं के पोषण, आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) और समग्र व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत के अनुसार, आवश्यकताएं एक निश्चित पदानुक्रम में व्यवस्थित होती हैं, जहाँ शारीरिक (Physiological), सुरक्षा (Safety), अपनेपन (Belongingness) और सम्मान (Esteem) की कमी संबंधी आवश्यकताएं (Deficiency Needs) पूरी होने के बाद ही व्यक्ति सर्वोच्च स्तर की 'आत्म-सिद्धि' (Growth Need/Self-Actualization) की ओर अग्रसर होता है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में, शिक्षक का यह दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वीकृत और सम्मानित वातावरण प्रदान करे ताकि वे अपनी पूर्ण रचनात्मक और बौद्धिक क्षमताओं (आत्म-सिद्धि) का विकास कर सकें।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित **'चिंतनात्मक चिंतन या विचार प्रक्रिया' (Reflective Thinking)**—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी समस्या या संदेहजनक स्थिति का सामना करते समय सक्रिय, persistent (सतत) और तार्किक रूप से विचार करता है, तथा निष्कर्षों तक पहुँचने के लिए साक्ष्यों की व्यवस्थित जाँच करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या-समाधान क्षमता और अनुभवात्मक ज्ञान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)**—जिसे उस सर्वोच्च संज्ञानात्मक और बौद्धिक कौशल के रूप में परिभाषित किया जाता है जो गैग्नी के अधिगम पदानुक्रम के सबसे शीर्ष पर स्थित होता है, जहाँ शिक्षार्थी किसी जटिल, नवीन और अपरिचित स्थिति में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संकल्पनाओं (Concepts) का संश्लेषण करके एक नया मार्ग या समाधान खोज निकालता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय तार्किक चिंतन, बौद्धिक स्वायत्तता और सर्जनात्मक अनुप्रयोग के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्टवादियों (Gestalt Psychologists—जैसे वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का) के 'अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत' (Theory of Insightful Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अचानक संज्ञान' या 'अहा! अनुभव' (Aha! Experience / Sudden Cognitive Restructuring) की अवधारणा—जिसके तहत किसी समस्या का समाधान क्रमिक प्रयासों से न होकर संपूर्ण परिस्थिति के मानसिक पुनर्गठन (Mental Restructuring) द्वारा अचानक और अंतर्दृष्टिपूर्ण तरीके से प्राप्त होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान की समग्र समझ (Holistic Understanding), और अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizers) की अवधारणा तथा उसके दो मुख्य प्रकारों—(1) तुलनात्मक संगठनकर्ता (Comparative Organizers) और (2) प्रदर्शनात्मक/विवरणात्मक संगठनकर्ता (Expository Organizers)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नवीन संज्ञानात्मक संरचनाओं के सक्रिय समावेश, अवगाहनपूर्ण अधिगम (Assimilation), और दीर्घकालिक स्मृति में तार्किक संकलन (Subsumption) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचनात्मक प्रणालियों—(1) इड (Id), (2) ईगो (Ego), और (3) सुपरईगो (Super-ego)—के साथ-साथ 'रक्षा तंत्र' (Defense Mechanisms) जैसे कि दमन (Repression), प्रक्षेपण (Projection), और युक्तिकरण (Rationalization) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तनाव प्रबंधन, अनैतिक आवेगों के उदात्तीकरण (Sublimation), और संवेगात्मक संतुलन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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