क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)
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नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) द्वारा प्रतिपादित **'शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन' (Branching Programmed Instruction)** की अवधारणा—जिसके तहत पारंपरिक रेखीय अनुदेशन की सीमाओं को पार करते हुए विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं, त्रुटियों और बौद्धिक क्षमताओं के आधार पर विभिन्न शाखाओं (विस्तृत उपचारात्मक पथ या उन्नत संवर्धन पथ) का प्रावधान किया जाता है, ताकि प्रत्येक शिक्षार्थी अपनी अनूठी गति से सीख सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के व्यक्तिगत स्वायत्त अधिगम, सुधारात्मक पृष्ठपोषण (Remediate Feedback) और संज्ञानात्मक पुनर्बलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
नॉर्मन क्राउडर (Norman Crowder) द्वारा प्रतिपादित 'शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन' (Branching Programmed Instruction) व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखने वाला एक अत्याधुनिक शिक्षण मॉडल है। इसमें विद्यार्थी की त्रुटियों को केवल गलती न मानकर उनके संज्ञानात्मक विकास का एक महत्वपूर्ण डेटा माना जाता है। गलत उत्तर देने पर विद्यार्थी को उपचारात्मक (Remedial) शाखा में भेजा जाता है जहाँ उस अवधारणा को सरल या अलग तरीके से समझाया जाता है, और सही उत्तर देने पर उसे आगे की उन्नत शाखा में भेज दिया जाता है। यह व्यक्तिगत अनुदेशन, तात्कालिक पृष्ठपोषण और त्रुटि-विश्लेषण के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है।
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बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित **'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement)** की अवधारणा—जिसके तहत किसी अप्रिय, कष्टदायक या अवांछित उद्दीपन (Aversive Stimulus) को हटाकर या रोककर किसी वांछित अनुक्रिया या व्यवहार की आवृत्ति और संभावना को बढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहारों के प्रोत्साहन, तनाव मुक्ति और अधिगम प्रबंधन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग या अनुक्रमिक संनिकटन विधि' (Shaping / Method of Successive Approximations) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल, नवीन या अवांछित व्यवहार को सीधे एक बार में सीखने के बजाय, वांछित अंतिम लक्ष्य की ओर ले जाने वाले छोटे-छोटे क्रमिक चरणों और हर एक सही सन्निकट अनुक्रिया (Approximation) पर सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) प्रदान करके धीरे-धीरे जटिल व्यवहार को ढाला या स्थापित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए एवं कठिन कौशलों के अर्जन, व्यवहार संशोधन और व्यवस्थित शिक्षण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध का सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग या रूपान्तरण/आकृतिकरण' (Shaping) की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल या नए वांछित व्यवहार को अचानक प्राप्त करने के बजाय, लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले क्रमिक और निकटवर्ती सन्निकटन (Successive Approximations) व्यवहारों को चरणबद्ध तरीके से पुनर्बलित (Reinforced) करके धीरे-धीरे स्थापित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशलों के अर्जन, सकारात्मक आदत निर्माण और क्रमिक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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