संज्ञानात्मक विकास
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के दौरान उभरने वाली प्रमुख क्षमता —'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning)— की अवधारणा, जिसके तहत किशोर बालक केवल प्रत्यक्ष और मूर्त वस्तुओं तक सीमित न रहकर अमूर्त विचारों, संभावनाओं और विभिन्न परिकल्पनाओं के आधार पर तार्किक रूप से निष्कर्ष निकालने तथा वैज्ञानिक पद्धति से समस्याओं का व्यवस्थित विश्लेषण करने में सक्षम हो जाते हैं, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन, आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और तार्किक विश्लेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) वह चरण है जहाँ बालक अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) और 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) की क्षमता प्राप्त करता है। इसके तहत छात्र समस्याओं के समाधान के लिए पहले विभिन्न परिकल्पनाएं (Hypotheses) बनाते हैं और फिर तार्किक रूप से उनका परीक्षण करके सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह क्षमता विज्ञान और गणित जैसे विषयों में उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक चिंतन और समस्या-समाधान के लिए अत्यंत आवश्यक है। अतः विकल्प (c) इस अवधारणा का सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of…
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रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के अनुक्रमिक सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर के अधिगम यानी 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Intelligence/Learning) की अवधारणा—जिसके तहत विद्यार्थी अपने पूर्व में सीखे गए नियमों, सिद्धांतों और कौशलों (Rules and Principles) का उपयोग करके किसी नवीन, जटिल और अनसुलझी समस्या का तार्किक, सृजनात्मक और व्यवस्थित समाधान निकालते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र बौद्धिक क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के दौरान विकसित होने वाली प्रमुख संज्ञानात्मक क्षमता —'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning)— की अवधारणा, जिसके तहत किशोर बालक किसी समस्या के समाधान के लिए केवल प्रत्यक्ष या मूर्त साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय सभी संभावित परिकल्पनाओं (Hypotheses) का मानसिक रूप से निर्माण करते हैं और फिर व्यवस्थित रूप से निगमनात्मक विधि द्वारा उनकी सत्यता कीि जांच करते हैं, के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उच्च-स्तरीय बौद्धिक संचालनों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बालक मूर्त वस्तुओं या छवियों पर निर्भर रहने के बजाय भाषा, प्रतीकों, गणितीय संकेतों और अमूर्त प्रणालियों के माध्यम से सूचनाओं को कोडित, संग्रहीत और संचालित करने की उच्च-स्तरीय क्षमता विकसित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के भीतर आने वाले 'परिकल्पित-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetico-Deductive Reasoning) की अवधारणा—जिसके तहत किशोर बालक किसी समस्या के समाधान के लिए केवल प्रत्यक्ष या मूर्त साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय सभी संभावित परिकल्पनाओं (Hypotheses) का मानसिक रूप से निर्माण करता है, उनका तार्किक विश्लेषण करता है और अंततः निगमनात्मक विधि द्वारा सर्वोत्तम निष्कर्ष पर पहुँचता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उच्च-स्तरीय बौद्धिक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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