जेरोम ब्रूनर
Asked 2 months ago · Viewed 17 times
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम' (Discovery Learning) सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए शब्दों, भाषा, गणितीय प्रतीकों और अमूर्त संकेतों का उपयोग करना सीख जाता है, जो इनैक्टिव (क्रियात्मक) और आइकॉनिक (प्रतिबिम्बात्मक) अवस्थाओं से आगे की उच्च-स्तरीय मानसिक प्रक्रिया है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और उन्नत संज्ञानात्मक संरचनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जेरोम ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) विकास की अंतिम और सबसे परिपक्व अवस्था है, जिसमें बालक भाषा, शब्दों और अमूर्त प्रतीकों के माध्यम से संसार को समझते हैं और मानसिक रूप से समस्याओं का समाधान करते हैं। यह अवस्था मूर्त अनुभवों से ऊपर उठकर उच्च-स्तरीय अमूर्त चिंतन, तार्किक विश्लेषण और स्वायत्त ज्ञान-निर्माण के लिए वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक है।
अगला प्रश्न →
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive…
← पिछला प्रश्न
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और…
Related Questions
→
लेव वाइगोत्स्की के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory) के अंतर्गत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD), 'स्केफोल्डिंग' (Scaffolding) और 'संज्ञानात्मक विकास में भाषा की भूमिका' (Role of Language in Cognitive Development) के तात्विक और शैक्षणिक निहितार्थों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, वाइगोत्स्की के अनुसार बालक के संज्ञानात्मक विकास और सामाजिक अंतःक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
→
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'मचान या पाड़' (Scaffolding) की तात्विक और शैक्षणिक गतिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जब कोई शिक्षक किसी जटिल संज्ञानात्मक कार्य के दौरान विद्यार्थी को 'प्रारंभिक चरण में अधिकतम सहायता' प्रदान करता है और जैसे-जैसे विद्यार्थी की स्वायत्तता बढ़ती जाती है, वह अपनी सहायता को धीरे-धीरे कम (Fade out) करता जाता है, तो इस संपूर्ण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक है?
→
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'चान्त्वना या मचान' (Scaffolding) की अवधारणाओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन एक शिक्षक की भूमिका और अधिगम प्रक्रिया की वास्तविक प्रकृति को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
→
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक सक्षम वयस्क या 'अधिक ज्ञानी अन्य' (MKO) बच्चे की क्षमता के वर्तमान स्तर और उसकी संभावित विकास सीमा के बीच के अंतर को पाटने के लिए अस्थायी सहायता प्रदान करता है, जिसे 'मचान निर्माण' (Scaffolding) कहा जाता है, तो इस पूरी संज्ञानात्मक अधिगम प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'खोज अधिगम या अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी को पूर्व-निर्मित या पकी-पकाई जानकारी देने के बजाय उसे ऐसी समस्यामूलक और संरचित परिस्थितियाँ प्रदान की जाती हैं जहाँ वह अपनी जिज्ञासा, प्रेक्षण और तार्किक प्रयोगों के माध्यम से स्वयं नियमों, सिद्धांतों और ज्ञान का अन्वेषण एवं निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक संज्ञान, तार्किक स्वायत्तता और अमूर्त चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Cognitive Theory of Instruction) के अंतर्गत प्रतिपादित 'खोजपूर्ण अधिगम या अन्वेषण अधिगम' (Discovery Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी को पहले से तैयार या पक्के नियम और सिद्धांत सीधे पढ़ाने के बजाय उसे स्वयं अपने परिवेश, आंकड़ों और क्रियाकलापों के माध्यम से तथ्यों का अन्वेषण करने, परिकल्पनाएं बनाने और स्वयं ज्ञान का निर्माण (Knowledge Construction) करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त ज्ञानार्जन, समस्या-समाधान और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम के सिद्धांत और खोजपूर्ण अधिगम' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बालक ज्ञान को और अधिक अमूर्त, भाषा आधारित, कोडित और प्रतीकात्मक प्रणालियों (जैसे गणितीय संकेत, अमूर्त शब्द, और तार्किक सूत्र) के माध्यम से प्रस्तुत और आत्मसात करने की क्षमता विकसित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक संप्रत्ययीकरण और उच्च-स्तरीय कोडिंग क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास और खोजपूर्ण अधिगम सिद्धांत' (Discovery Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा वस्तुओं या अनुभवों को मानसिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए अमूर्त प्रतीकों, भाषा, गणितीय चिह्नों और कोड का उपयोग करना सीख जाता है, जो ब्रूनर की त्रि-स्तरीय विकासात्मक प्रणाली (क्रियात्मक, प्रतिबिम्बात्मक और प्रतीकात्मक) का अंतिम और सबसे उच्च तथा अमूर्त चरण है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और सैद्धांतिक संकल्पनाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.