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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति में प्रकृति की विभिन्न प्रजातियों, वनस्पतियों, जीवों, मौसम के पैटर्न और पारिस्थितिक तंत्र के सूक्ष्म अंतरों को पहचानने, वर्गीकृत करने और उनके साथ सफलतापूर्वक बातचीत करने की उच्च क्षमता पाई जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुभवात्मक अधिगम, पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण और व्यावहारिक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के बहु-बुद्धि सिद्धांत के अनुसार, 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalistic Intelligence) वह क्षमता है जो व्यक्ति को पौधों, जानवरों और प्रकृति के अन्य तत्वों (जैसे चट्टानों, बादलों और पारिस्थितिक तंत्र) को पहचानने, वर्गीकृत करने और उनके साथ अंतःक्रिया करने में सक्षम बनाती है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में इसका उपयोग करके शिक्षक बच्चों को पर्यावरण अध्ययन (EVS), क्षेत्र-भ्रमण (Field Trips), और प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) का अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिससे उनका संज्ञानात्मक और व्यावहारिक दायरा विस्तृत होता है। अतः विकल्प (C) वैज्ञानिक रूप से सबसे प्रामाणिक कथन है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की अवधारणा—जिसके तहत लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक बालक में अमूर्त चिंतन, परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning), वैज्ञानिक सोच और विभिन्न संभावनाओं का एक साथ मानसिक विश्लेषण करने की उच्च-स्तरीय क्षमता विकसित हो जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक मूल्यांकन, स्वतंत्र वैचारिक निर्माण और उन्नत समस्या-समाधान कौशल के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रतीकात्मक अवस्था' (Symbolic Stage) की अवधारणा—जिसके तहत बालक मूर्त वस्तुओं या छवियों पर निर्भर रहने के बजाय भाषा, प्रतीकों, गणितीय संकेतों और अमूर्त प्रणालियों के माध्यम से सूचनाओं को कोडित, संग्रहीत और संचालित करने की उच्च-स्तरीय क्षमता विकसित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अमूर्त चिंतन, तार्किक अभिव्यक्ति और संज्ञानात्मक विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आवश्यकताओं का पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के शीर्षस्थ चरण यानी 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) तथा उससे ठीक पूर्व के चरण 'सम्मान की आवश्यकताएं' (Esteem Needs) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की आंतरिक प्रेरणा, क्षमता के पूर्ण विकास, और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बच्चा यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, रंग, आकार या विन्यास (Appearance) में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहती है, और यह क्षमता सामान्यतः किस संज्ञानात्मक अवस्था में पूर्ण रूप से विकसित होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विसर्जन, विकेंद्रीकरण (Decentration) और मूर्त चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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