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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के भीतर आने वाले चरण 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के कल्याण के लिए लचीले सामाजिक अनुबंध हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या व्यक्तिगत न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध जाता है, तो उसे लोकतांत्रिक और तार्किक तरीकों से बदला जाना चाहिए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक नागरिकता, आलोचनात्मक नैतिक चिंतन और न्याय-बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) का पांचवा चरण 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) कहलाता है। इस चरण में व्यक्ति यह समझता है कि कानून और नियम कठोर या अपरिवर्तनीय नहीं हैं, बल्कि वे समाज के सदस्यों के बीच एक प्रकार का 'सामाजिक अनुबंध' (Social Contract) हैं। यदि कोई नियम समाज के बहुमत के कल्याण या मूल मानवाधिकारों का हनन करता है, तो उसे तार्किक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बदला जाना चाहिए। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह अवधारणा विद्यार्थियों के भीतर आलोचनात्मक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक चेतना और न्याय-बोध को बढ़ावा देने में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रीनहोल्ड बाल्डेसर (Reinhold Baltes) और पॉल बाल्डेस (Paul Baltes) के 'जीवनपर्यन्त विकास के जीवन काल परिप्रेक्ष्य' (Life-Span Perspective of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित बहुआयामीता (Multidimensionality), बहुदिशात्मकता (Multidirectionality), और प्लास्टिसिटी (Plasticity - नमनीयता) की अवधारणाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं, विकासात्मक परिवर्तनों और संज्ञानात्मक अनुकूलनशीलता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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