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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रीनहोल्ड बाल्डेसर (Reinhold Baltes) और पॉल बाल्डेस (Paul Baltes) के 'जीवनपर्यन्त विकास के जीवन काल परिप्रेक्ष्य' (Life-Span Perspective of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित बहुआयामीता (Multidimensionality), बहुदिशात्मकता (Multidirectionality), और प्लास्टिसिटी (Plasticity - नमनीयता) की अवधारणाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं, विकासात्मक परिवर्तनों और संज्ञानात्मक अनुकूलनशीलता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पॉल बाल्डेस (Paul Baltes) का जीवनपर्यन्त विकास का परिप्रेक्ष्य (Life-Span Perspective) यह मानता है कि विकास जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है, जो बहुआयामी (Multidimensional - जैविक, संज्ञानात्मक, सामाजिक), बहुदिशात्मक (Multidirectional - कुछ आयाम बढ़ते हैं तो कुछ घटते हैं), और प्लास्टिसिटी (Plasticity - अनुभवों और प्रशिक्षण के आधार पर परिवर्तनशील) से युक्त होती है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह दृष्टिकोण शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि प्रत्येक विद्यार्थी की विकासात्मक गति अलग हो सकती है और उचित शैक्षिक हस्तक्षेप व अनुकूलन से उनकी क्षमताओं को संवारा जा सकता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के भीतर आने वाली अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक अंतरात्मा अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति बाहरी सामाजिक नियमों, कानूनों या अधिकारों से ऊपर उठकर अपने स्वयं के विवेक, न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों, मानव अधिकारों और अंतरात्मा की आवाज के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम सामाजिक व्यवस्था के विपरीत क्यों न हों—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक तर्क, आंतरिक न्यायबोध और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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