संज्ञानात्मक विकास
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत मुख्य शिक्षण सामग्री या नवीन पाठ को पढ़ाने से पहले छात्रों के संज्ञान में मौजूद पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) के साथ नए संप्रत्ययों को जोड़ने और जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, अमूर्त और व्यापक परिचयात्मक सामग्री या ढांचा प्रस्तुत किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा निर्माण, संज्ञानात्मक संरचना और तार्किक समावेश के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
डेविड औसुबेल (David Ausubel) के अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer) वे शैक्षणिक उपकरण या परिचयात्मक सामग्रियां हैं जिन्हें मुख्य पाठ से पहले प्रस्तुत किया जाता है। इनका मुख्य कार्य शिक्षार्थियों के वर्तमान पूर्व-ज्ञान (Prior Knowledge) और नए आने वाले संप्रत्ययों के बीच एक 'संज्ञानात्मक पुल' या सेतु का निर्माण करना होता है। इसके माध्यम से छात्र नवीन सूचनाओं को अपनी मौजूदा संज्ञानात्मक संरचना या स्कीमा में 'सबज्यूम्प्शन' (Subsumption - समावेश) प्रक्रिया द्वारा सार्थक रूप से जोड़ पाते हैं, जिससे रटकर सीखने के बजाय अर्थपूर्ण अधिगम (Meaningful Learning) सुनिश्चित होता है। अतः विकल्प (b) इस अवधारणा का सबसे प्रामाणिक और वैज्ञानिक विश्लेषण है।
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रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning) की अवधारणा—जिसके तहत यह उच्चतम स्तर का अधिगम (आठवाँ स्तर) है जहाँ शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करके एक नई, जटिल और अनपेक्षित समस्या का तार्किक समाधान खोजता है तथा संज्ञानात्मक नियमों का पुनर्गठन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल, स्वतंत्र चिंतन और सृजनात्मकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'अर्थपूर्ण मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अग्रगामी संगठक' (Advance Organizer) की अवधारणा—जिसके तहत किसी नए और जटिल विषय को पढ़ाने से पहले छात्रों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और ज्ञान के साथ नए संप्रत्ययों को जोड़ने के लिए एक उच्च-स्तरीय, समावेशी और परिचयात्मक सामग्री प्रस्तुत की जाती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा (Schema) के पुनर्गठन, पूर्व-ज्ञान एकीकरण और तार्किक अवबोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा किसी वस्तु, घटना या समस्या के केवल एक ही आयाम (जैसे केवल लंबाई या केवल चौड़ाई) पर केंद्रित रहने (Centration) की मानसिक सीमा से ऊपर उठकर एक साथ कई आयामों या दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित करने और उनके बीच तार्किक संबंध स्थापित करने की क्षमता हासिल कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहु-आयामी चिंतन, संरक्षण (Conservation) की समझ और तार्किक संक्रियाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चा किसी वस्तु या घटना के केवल एक ही आयाम (जैसे केवल लंबाई या केवल चौड़ाई) पर ध्यान केंद्रित करने की अपनी पूर्व प्रवृत्ति (Centration) से ऊपर उठकर एक ही समय में एक से अधिक आयामों, पक्षों या दृष्टिकोणों को एक साथ देखने, मानसिक रूप से समन्वय स्थापित करने और तार्किक विचार करने की क्षमता अर्जित कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहु-आयामी चिंतन, संरक्षण (Conservation) के संप्रत्यय और तार्किक अवबोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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