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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) और पैट किलपैट्रिक (Pat Kilpatrick) द्वारा प्रतिपादित 'प्रोजेक्ट विधि' (Project Method) या 'योजना पद्धति' के अंतर्गत आने वाले उस मूल चरण की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी वास्तविक जीवन की किसी सामाजिक या प्रायोगिक समस्या के समाधान के लिए एक स्वाभाविक, उद्देश्यपूर्ण कार्य (Purposeful Activity) की रूपरेखा तैयार करते हैं, उसे सामाजिक वातावरण में क्रियान्वित करते हैं और उसके परिणामों का मूल्यांकन करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सहयोगात्मक कौशल, व्यावहारिक ज्ञान, और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के दृष्टिकोण से जॉन डीवी के दर्शन पर आधारित 'प्रोजेक्ट विधि' (Project Method) बाल-केंद्रित शिक्षा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक पद्धति है। इसके मूल में 'करके सीखना' (Learning by Doing), प्रायोगिक अनुभव, स्वायत्तता, और सामाजिक सहकारिता निहित होती है। यह विधि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ती है, जिससे उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक, सामाजिक और समस्या-समाधान कौशल का समग्र विकास होता है। अतः विकल्प (ब) इस विधि के मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे सटीक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'संबंधवाद के सिद्धांत' (Connectionism / Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित मुख्य नियमों—(1) तत्परता का नियम (Law of Readiness), (2) अभ्यास का नियम (Law of Exercise), और (3) प्रभाव का नियम (Law of Effect)—के साथ-साथ 'गौण नियमों' के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की त्रुटि-संशोधन प्रक्रिया, संतोषजनक परिणामों द्वारा अधिगम के स्थायित्व, और तंत्रिका पथों (Neural Pathways) के सुदृढ़ीकरण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'पुनर्बलन अनुसूचियों' (Schedules of Reinforcement)—विशेष रूप से 'चर अनुपात अनुसूची' (Variable-Ratio Schedule) तथा 'नियत अंतराल अनुसूची' (Fixed-Interval Schedule)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के वांछित व्यवहारों के स्थायित्व, विलोपन (Extinction) के प्रतिरोध, और आंतरिक अभिप्रेरण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्राकृतिक बुद्धि या नेचुरलिस्ट इंटेलिजेंस' (Naturalist Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति प्रकृति के विभिन्न रूपों (जैसे- पेड़-पौधों, जीवों, खनिजों, मौसम चक्र और पारिस्थितिकी तंत्र) के बीच सूक्ष्म अंतर करने, उन्हें पहचानने, वर्गीकृत करने और प्राकृतिक वातावरण के साथ प्रभावी ढंग से संवादात्मक सामंजस्य स्थापित करने में अत्यधिक कुशल होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पर्यावरणीय बोध, अनुभवात्मक प्रकृति-अन्वेषण और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतra-वैयक्तिक बुद्धि' (Intrapersonal Intelligence)**—जिसे उस विशिष्ट मनोवैज्ञानिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वयं के आंतरिक संवेगों, भावनाओं, प्रेरणाओं, शक्तियों, कमजोरियों और जीवन के लक्ष्यों का सूक्ष्म, सचेत और गहरा बोध रखते हुए अपने व्यवहार का स्व-नियमन (Self-regulation) और आत्म-चिंतन करने में पूरी तरह सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-प्रबंधन, उच्च-स्तरीय स्वायत्तता और स्व-जागरूकता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न-नक्शा अधिगम सिद्धांत' (Sign-Gestalt / Latent Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सुप्त या गुप्त अधिगम' (Latent Learning)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक घटना के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत अधिगम आंतरिक रूप से घटित होता है और मानसिक मानचित्र (Cognitive Map) के रूप में मस्तिष्क में संचित रहता है, भले ही उस समय किसी प्रकार का बाह्य सुदृढ़ीकरण या पुरस्कार (Reinforcement/Reward) प्रदान न किया जा रहा हो, और वह अधिगम तब स्पष्ट रूप से बाहर प्रकट (Performance) होता है जब कोई उपयुक्त प्रोत्साहन या आवश्यकता उत्पन्न होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक ज्ञान संचयन, संज्ञानात्मक मानचित्रण और अनायास बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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