BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
5 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) के 'मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत' (Humanistic Theory of Motivation) अर्थात् 'आवश्यकताओं के पदानुक्रम' (Hierarchy of Needs) के अंतर्गत सर्वोच्च शिखर पर प्रतिपादित 'आत्म-सिद्धि या आत्म-वास्तविकीकरण' (Self-Actualization) की अवधारणा—जिसके तहत व्यक्ति अपनी संपूर्ण आंतरिक क्षमताओं, सृजनात्मकता, और वास्तविक पोटेंशियल का पूरी तरह से विकास कर लेता है, जब उसकी शारीरिक, सुरक्षा, अपनेपन और सम्मान जैसी सभी न्यूनता संबंधी आवश्यकताएं (Deficiency Needs) संतुष्टि पा लेती हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र विकास, आंतरिक प्रेरणा और स्व-अन्वेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

अब्राहम मास्लो के मानवतावादी प्रेरणा सिद्धांत के अनुसार, आवश्यकताएं एक पदानुक्रम में व्यवस्थित होती हैं। निचले स्तर की आवश्यकताएं 'न्यूनता आवश्यकताएं' (Deficiency Needs या D-needs) होती हैं जैसे शारीरिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं। जब ये पूरी हो जाती हैं, तब व्यक्ति उच्च स्तरीय 'विकास आवश्यकताएं' (Growth Needs या B-needs) की ओर अग्रसर होता है, जिसके सर्वोच्च शिखर पर 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) स्थित है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में, एक शिक्षक का यह दायित्व है कि वह विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, भय-मुक्त और सम्मानजनक वातावरण बनाए (बुनियादी आवश्यकताएं पूर्ण करे), ताकि वे अपनी अंतर्निहित क्षमताओं, सृजनात्मकता और आत्म-वास्तविकीकरण (Self-Actualization) के मार्ग पर स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकें। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य मनोवैज्ञानिक कथन है।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थार्नकाइंड (Edward Thorndike) के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'प्रभाव का नियम या लॉ ऑफ़ इफ़ेक्ट' (Law of Effect)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार जिन कार्यों या अनुक्रियाओं से प्राणी को संतोष, सुखद परिणाम या पुरस्कार प्राप्त होता है, वे कार्य मजबूत हो जाते हैं और भविष्य में उसी परिस्थिति में दोहराए जाने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि असंतोष या दंड उत्पन्न करने वाले कार्य कमजोर हो जाते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, सकारात्मक अभिप्रेरणा (Positive Motivation) और संतोषजनक अधिगम पथ के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) और 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित **'चिंतनशील चिंतन / विचारात्मक चिंतन' (Reflective Thinking)** की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी किसी समस्या का सामना करने पर केवल याद की गई जानकारियों पर निर्भर रहने के बजाय सक्रिय रूप से अपने अनुभवों का विश्लेषण करता है, परिकल्पनाएं गढ़ता है और तार्किक रूप से वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) का उपयोग करते हुए समाधान तक पहुंचता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking), समस्या-समाधान क्षमताओं और अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानववादी अधिगम सिद्धांत' (Humanistic Theory of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय शैक्षणिक अवधारणा—**'अनुभवजन्य या अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning)**—जिसे केवल बाहरी तथ्यों को रटने या ज्ञान को निष्क्रिय रूप से ग्रहण करने के विपरीत, शिक्षार्थी की अपनी व्यक्तिगत जिज्ञासा, आंतरिक प्रेरणा और वास्तविक जीवन की अर्थपूर्ण परिस्थितियों से सीधे जुड़कर ज्ञान का सक्रिय निर्माण करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-निर्देशित अध्ययन (Self-directed Learning), संवेगात्मक स्वायत्तता और सार्थक व्यक्तिगत विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, आईवान पावलव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित—(1) उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization), (2) विभेदन (Discrimination), (3) विलोप (Extinction), और (4) स्वतः पुनःप्राप्ति (Spontaneous Recovery)—जैसी मूलभूत अनुबंधन प्रक्रियाओं के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के भावनात्मक सहचर्य, सकारात्मक/नकारात्मक आदतों के निर्माण, और भय या चिंता के निराकरण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt Psychology) के संस्थापकों में से एक मैक्स वर्थहाइमर (Max Wertheimer) और उनके सहयोगियों द्वारा प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अंतर्दृष्टि अधिगम या सूझ का सिद्धांत' (Insight Learning / A-ha Experience)**—जिसे उस अचानक और तात्कालिक संज्ञानात्मक पुनर्गठन (Cognitive Restructuring) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी किसी समस्याग्रस्त परिस्थिति के बिखरे हुए घटकों या बाह्य संबंधों को यांत्रिक प्रयासों द्वारा नहीं, बल्कि अपने मानसिक पटल पर संपूर्णता (Wholeness) में देखकर अचानक से उसके मूल समाधान (Insight) को प्राप्त कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक सूझबूझ, अर्थपूर्ण ज्ञान-सर्जन और रचनात्मक समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.