त्वरित लिंक्स
MPTET
5 views
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शेपिंग' (Shaping) या 'रूप देना / आकृति प्रदान करना' की अवधारणा—जिसके तहत किसी जटिल, वांछित या नवीन व्यवहार को क्रमिक रूप से प्राप्त करने के लिए 'समीपस्थ सन्निकटन विधि' (Method of Successive Approximations) का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्रत्येक चरण पर सही प्रतिक्रिया के लिए सुदृढीकरण (Reinforcement) प्रदान किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के कठिन कौशल अर्जन, चरणबद्ध प्रगति, और सकारात्मक व्यवहार संशोधन के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बी. एफ. स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत में 'शेपिंग' (Shaping) या आकृति प्रदान करना एक अत्यधिक महत्वपूर्ण तकनीक है। जब कोई जीव या विद्यार्थी किसी जटिल या पूरी तरह से नए व्यवहार को सीधे तौर पर प्रदर्शित नहीं कर सकता, तो 'समीपस्थ सन्निकटन विधि' (Method of Successive Approximations) का उपयोग किया जाता है। इसके तहत, अंतिम वांछित लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले प्रत्येक छोटे और क्रमिक कदम (Approximation) को सकारात्मक सुदृढीकरण (Reinforcement) प्रदान किया जाता है। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में, कठिन कौशलों (जैसे लेखन, गणितीय समस्या-समाधान, या जटिल प्रयोग) को छोटे-छोटे चरणों में विभाजित करके और हर सफल चरण पर विद्यार्थियों की सराहना या सुदृढीकरण करके उनके व्यवहार को सफलतापूर्वक ढाला (Shape) जाता है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य मनोवैज्ञानिक कथन है।
Related Questions
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - लगभग 11 से 15 वर्ष या उससे आगे) के दौरान उभरने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्कणा' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजकता विचार' (Combinatorial Thinking) की अवधारणाओं—जिनके तहत किशोर मूर्त वस्तुओं की सीमाओं से परे जाकर अमूर्त प्रस्तावनाओं (Abstract Propositions), तार्किक विकल्पों के व्यवस्थित संयोजनों और वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक चिंतन, अमूर्त संकल्पनाओं के विश्लेषण, और बौद्धिक स्वायत्तता के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रकृतिवादी बुद्धि' (Naturalist Intelligence) तथा 'अस्तित्ववादी बुद्धि' (Existentialist Intelligence) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, और मानव अस्तित्व के दार्शनिक प्रश्नों के अन्वेषण के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning)**—जिसे उस सर्वोच्च और अंतिम संज्ञानात्मक अधिगम स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी केवल पूर्व नियमों, सिद्धांतों या तथ्यों का स्मरण नहीं करता, बल्कि नए और जटिल संदर्भात्मक नियमों का उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक संज्ञानात्मक रणनीतियों (Cognitive Strategies) और तार्किक चिंतन के माध्यम से पूरी तरह से नवीन और अपरिचित समस्याओं का सफल समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय बौद्धिक विकास, विश्लेषणात्मक क्षमता और स्वतंत्र ज्ञान-अर्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधवादी सिद्धांत' (Connectionism Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय नियम—**'तत्परता का नियम' (Law of Readiness)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ जब कोई तंत्रिकाीय पथ (Neural Pathway) कार्य करने के लिए पूरी तरह से तैयार होता है और उसे कार्य करने दिया जाता है, तो यह शिक्षार्थी के लिए संतोषजनक होता है, जबकि तैयार होने पर बाधा उत्पन्न होने पर वह कष्टदायक और अधिगम में बाधक बनता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की मानसिक तैयारी, प्रेरणा के स्तर और अनुकूलतम अधिगम परिवेश के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, उरी ब्रॉन्फेनब्रेनर (Urie Bronfenbrenner) के 'पारिस्थितिकीय प्रणालियों के सिद्धांत' (Ecological Systems Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'मीसोसिस्टम' (Mesosystem) की अवधारणा—जिसके तहत बच्चे के विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न सूक्ष्म तंत्रों (जैसे परिवार, विद्यालय, साथियों का समूह और पड़ोस) के बीच होने वाले अंतःसंबंधों और अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के समग्र समायोजन, सहयोगात्मक अभिभावक-शिक्षक भागीदारी और सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.