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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) के 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत प्रतिपादित 'शारीरिक-गत्यात्मक बुद्धि' (Bodily-Kinesthetic Intelligence) तथा 'संगीतपरक बुद्धि' (Musical Intelligence) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की शारीरिक-मानसिक समन्वय क्षमताओं (Motor-Cognitive Coordination), लयबद्ध और श्रवण संबंधी संवेदनशीलता, और अनुभवात्मक प्रदर्शन कलाओं (Performing Arts) के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

हॉवर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत के अनुसार, शारीरिक-गत्यात्मक बुद्धि शरीर पर नियंत्रण और वस्तुओं को कौशलपूर्वक संभालने की क्षमता से जुड़ी है, जबकि संगीतपरक बुद्धि लय, स्वर और ताल को समझने व सृजित करने की क्षमता है। कक्षा में इन बुद्धियों का उपयोग करने के लिए अनुभवात्मक अधिगम, रोल-प्ले, नृत्य, खेल और लयबद्ध स्मरणीय उपकरणों (Mnemonic devices) का प्रयोग किया जाता है, जिससे बहु-संवेदी सहभागिता बढ़ती है और अधिगम अधिक स्थायी तथा प्रभावी बनता है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'अधिगम का अन्वेषण सिद्धांत' (Discovery Learning / Theory of Instruction) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सर्पिलाकार पाठ्यक्रम या स्पाइरल करिकुलम' (Spiral Curriculum)**—जिसे उस शैक्षणिक डिजाइन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी जटिल विषय या मूल अवधारणा को बालक के विकास के विभिन्न चरणों में बार-बार, अधिक परिष्कृत और अमूर्त स्तर पर (सरल से जटिल की ओर) पुनः प्रस्तुत किया जाता है, ताकि शिक्षार्थी अपने पूर्व अनुभवों और ज्ञान के आधार पर नए और गहरे अर्थों का निर्माण कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक विकास, बोधगम्यता और ज्ञान की निरंतरता (Continuity of Knowledge) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैने (Robert Gagné) के 'अधिगम के अनुक्रम' (Conditions of Learning) के सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित उच्चतम स्तर के अधिगम यानी 'समस्या समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित सिद्धांतों, नियमों और कौशलों का उपयोग करके किसी नवीन, जटिल और अनसुलझी परिस्थिति या समस्या का तार्किक, विश्लेषणात्मक और सृजनात्मक समाधान खोजता है तथा एक नया आंतरिक नियम या सिद्धांत निर्मित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास, तार्किक चिंतन और स्वतंत्र ज्ञान-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर की अधिगम प्रकार —'समस्या समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning)— की अवधारणा, जिसके तहत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करके एक जटिल, नवीन और अनूठी समस्या का तार्किक, विश्लेषणात्मक और सृजनात्मक समाधान खोजता है तथा इससे उसकी संज्ञानात्मक क्षमताओं एवं उच्च-स्तरीय बौद्धिक योजनाओं (Cognitive Structures) का स्थायी विस्तार होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, स्वतंत्र बौद्धिक अन्वेषण और उच्च-कोटि के मानसिक प्रसंस्करण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'शेपिंग या आकृतीकरण' (Shaping)**—जिसे उस क्रमिक संनिकटन (Successive Approximations) की जटिल मनोवैज्ञानिक विधि के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी जटिल, नवीन या अवांछित रूप से दूर स्थित वांछित अंतिम व्यवहार को स्थापित करने के लिए, प्राणी के उन छोटे-छोटे क्रमिक व्यवहारों को लगातार प्रबलित (Reinforce) किया जाता है जो अंतिम लक्ष्य की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशल अर्जन, चरणबद्ध व्यवहार संशोधन और अधिगम वक्र के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रॉबर्ट गैने (Robert Gagné) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर के अधिगम यानी 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning) तथा उससे ठीक पूर्व के स्तर 'सिद्धांत अधिगम' (Rule Learning) के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, तार्किक नियमों के सामान्यीकरण, और जटिल बौद्धिक कौशलों के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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