BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

MPTET
3 views

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'शेपिंग या आकृतीकरण' (Shaping)**—जिसे उस क्रमिक संनिकटन (Successive Approximations) की जटिल मनोवैज्ञानिक विधि के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी जटिल, नवीन या अवांछित रूप से दूर स्थित वांछित अंतिम व्यवहार को स्थापित करने के लिए, प्राणी के उन छोटे-छोटे क्रमिक व्यवहारों को लगातार प्रबलित (Reinforce) किया जाता है जो अंतिम लक्ष्य की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशल अर्जन, चरणबद्ध व्यवहार संशोधन और अधिगम वक्र के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के पाठ्यक्रम और बाल मनोविज्ञान के अंतर्गत, बी. एफ. स्किनर का 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत में **'शेपिंग या आकृतीकरण' (Shaping)** एक केंद्रीय तकनीक है, जिसे **'क्रमिक संनिकटन' (Successive Approximations)** भी कहा जाता है। जब कोई विद्यार्थी किसी जटिल कौशल (जैसे- सुंदर लिखावट, कठिन गणितीय समीकरण हल करना या वैज्ञानिक प्रयोग करना) को पहली बार सीख रहा होता है, तो वह एक बार में संपूर्ण और त्रुटिहीन व्यवहार प्रदर्शित नहीं कर सकता। ऐसे में, शिक्षक या मनोवैज्ञानिक अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले छोटे-छोटे प्रारंभिक और क्रमिक प्रयासों (Steps) को पहचानते हैं और जैसे-जैसे बालक लक्ष्य के करीब पहुँचता जाता है, प्रत्येक सही चरण पर 'सकारात्मक पुनर्बलन' (Positive Reinforcement) प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, क्रमिक चरणों के माध्यम से व्यवहार को 'आकार' (Shape) दिया जाता है। अतः विकल्प (b) इस संप्रत्यय का सबसे सटीक, वैज्ञानिक और प्रामाणिक मनोवैज्ञानिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है, जबकि अन्य विकल्प भ्रामक और सिद्धांत के विपरीत हैं।
Share:

Related Questions

मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत' (Socio-Cultural Theory of Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'ज्ञान के सह-निर्माण और निर्देशित सहभागिता' (Co-construction of Knowledge and Guided Participation)**—जिसे उस सहयोगात्मक शैक्षणिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी अपनी संस्कृति, भाषा और अधिक ज्ञاني अन्य (MKO) व्यक्तियों (जैसे शिक्षक, सहपाठी या अभिभावक) के साथ सामाजिक अंतःक्रिया करते हुए 'समीपस्थ विकास के क्षेत्र' (ZPD) के भीतर सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण और आंतरिकरण (Internalization) करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास, सामाजिक मध्यस्थता और सार्थक ज्ञान-अर्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, नॉर्मन मान (Norman Munn) एवं अन्य मनोवैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषित और गेस्टाल्ट मनोविज्ञान (Gestalt Psychology) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय मानसिक प्रक्रिया—**'अंतर्दृष्टि या सूझ का सिद्धांत' (Insight Learning Theory / Wolfgang Köhler)**—जिसे किसी समस्या की समग्र परिस्थिति (Total Field) का अचानक और स्पष्ट बोध होने तथा बिना किसी यांत्रिक प्रयास के मानसिक पुनर्गठन (Cognitive Restructuring) द्वारा समस्या के समाधान को प्राप्त करने की अचानक होने वाली संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विश्लेषण, बोधगम्य समझ और रचनावादी अधिगम (Constructivist Learning) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, गेस्टाल्टवादियों (Gestalt Psychologists—जैसे वर्दीमर, कोहलर और कोफ्का) के 'अंतर्दृष्टि या सूझ के सिद्धांत' (Theory of Insightful Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अचानक संज्ञान' या 'अहा! अनुभव' (Aha! Experience / Sudden Cognitive Restructuring) की अवधारणा—जिसके तहत किसी समस्या का समाधान क्रमिक प्रयासों से न होकर संपूर्ण परिस्थिति के मानसिक पुनर्गठन (Mental Restructuring) द्वारा अचानक और अंतर्दृष्टिपूर्ण तरीके से प्राप्त होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के रचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान की समग्र समझ (Holistic Understanding), और अर्थपूर्ण अधिगम के वैज्ञानिक प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'अनुलग्नक या लगाव का सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सुरक्षित अनुलग्नक' (Secure Attachment)**—जिसे उस गुणात्मक रूप से स्वस्थ भावनात्मक बंधन के रूप में परिभाषित किया जाता है जो शिशु और उसके प्राथमिक देखभालकर्ता (Primary Caregiver) के बीच स्थापित होता है, जहाँ शिशु देखभालकर्ता को अपनी सुरक्षा का 'सुरक्षित आधार' (Secure Base) मानता है, देखभालकर्ता की अनुपस्थिति में सहज रूप से विचलित होता है किंतु उसकी वापसी पर तुरंत शांत होकर उससे भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), सामाजिक अन्वेषण (Social Exploration) और आत्म-विश्वास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर (Post-Conventional Morality Level) के दूसरे चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून का पालन बाहरी दबाव, दंड के भय या सामाजिक अनुमोदन के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वयं के आंतरिक रूप से विकसित सार्वभौमिक न्याय, मानवाधिकारों और अंतरात्मा के उन उच्च नैतिक सिद्धांतों के आधार पर करता है जो संपूर्ण मानवता के लिए न्यायसंगत और तार्किक रूप से अनिवार्य होते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नैतिक स्वायत्तता, तार्किक निर्णय लेने की क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.