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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के पठार और थकान' (Plateaus in Learning and Fatigue) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) और आर्थर गेट्स द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम पठार' (Plateaus in Learning) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'लेट्रल इन्ट्रापैरिएटल कॉर्टेक्स' (Lateral Intraparietal Cortex), और 'रेटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम' (Reticular Activating System - RAS) के बीच संज्ञानात्मक संतृप्ति (Cognitive Saturation), सिनैप्टिक थकान (Synaptic Fatigue), और कार्यकारी नियंत्रण शमन की सक्रियण गतिकी, तथा कार्ल जंग और विलियम जेम्स के ध्यान विस्थापन सिद्धांतों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-प्लेटॉ ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Plateau Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में ब्रेक प्रबंधन, कार्य-विविधता (Task Variety) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

अधिगम के पठार (Plateaus in Learning) का न्यूरो-संज्ञानात्मक विश्लेषण यह दर्शाता है कि जब विद्यार्थी एक ही प्रकार की शिक्षण विधि या अत्यधिक गहन मानसिक श्रम लंबे समय तक करते हैं, तो मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' और 'रेटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम (RAS)' में संज्ञानात्मक संतृप्ति (Cognitive Saturation) और सिनैप्टिक थकान उत्पन्न हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप प्रदर्शन अस्थायी रूप से स्थिर हो जाता है। 'न्यूरो-प्लेटॉ ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' के तहत कार्य-विविधता (Task Variety), रणनीतिक विश्राम (Strategic Breaks) और बहुसंवेदी शिक्षण विधियों का उपयोग करके इस तंत्रिका संबंधी थकान को दूर किया जा सकता है और अधिगम की गति को पुनः सुचारू बनाया जा सकता है। अत: विकल्प (b) सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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हिंदी व्याकरण के अंतर्गत, 'वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्दों के परस्पर संबंध या मेल' को स्पष्ट करने वाली व्याकरणिक इकाई 'कारक' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन अपादान कारक और करण कारक के बीच के मूल अंतर को सबसे सटीक रूप से प्रदर्शित करता है? पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (Continuous and Comprehensive Evaluation - CCE) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सी.सी.ई. (CCE) का मुख्य उद्देश्य केवल छात्रों के संज्ञानात्मक (Cognitive) विकास का अंतिम परीक्षा के आधार पर आंकलन करना है, और यह सह-शैक्षणिक पक्षों के मूल्यांकन को पूरी तरह से नजरअंदाज करता है। 2. पर्यावरण अध्ययन में सतत मूल्यांकन का तात्पर्य शिक्षण प्रक्रिया के दौरान निरंतर रूप से विद्यार्थियों की अवधारणाओं की समझ, उनकी भ्रांतियों (Misconceptions) और व्यावहारिक कौशलों का अवलोकन करना है। 3. व्यापक मूल्यांकन के अंतर्गत पर्यावरण के प्रति छात्रों के दृष्टिकोण, मूल्य, संवेदनशीलता (Sensitization towards environment) तथा उनके सामाजिक-सांस्कृतिक अनुभवों का भी गुणात्मक आकलन शामिल होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध कालीन शिक्षण संस्थानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध मठों में शिक्षा की शुरुआत 'प्रवज्या' (Pravrajya) संस्कार के साथ होती थी, जिसके अंतर्गत 8 वर्ष की आयु पूरी होने पर बालक को मठ में प्रवेश दिया जाता था और वह श्रमण (भिक्षु) बनता था, जबकि उच्च शिक्षा पूरी होने पर 'उपनसंपदा' संस्कार संपन्न होता था। 2. विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त वंश के राजा कुमारगुप्त प्रथम द्वारा की गई थी, जो वज्रयान बौद्ध धर्म, तांत्रिक शिक्षा और तर्कशास्त्र के अध्ययन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था। 3. तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान में पाकिस्तान के रावलपिंडी के पास स्थित प्राचीन शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था, जहाँ आयुर्वेद, सैन्य विज्ञान, राजनीति शास्त्र और खगोल विज्ञान की शिक्षा दी जाती थी और यहाँ चाणक्य तथा जीवक जैसे महान विद्वानों ने अध्ययन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? बच्चों के भाषा विकास और संज्ञानात्मक विकास के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन पियाजे का मानना था कि भाषा का उद्भव बच्चे के 'अहंप्रकेंद्रित वाक्' (Egocentric Speech) से होता है और भाषा विकास मूलतः संज्ञानात्मक विकास के अधीन (Subordinate) होता है, यानी पहले विचार आता है और बाद में भाषा। 2. लेव वायगोत्स्की के अनुसार भाषा और विचार आरंभिक जीवन (लगभग 2 वर्ष की आयु तक) में दो स्वतंत्र और अलग जड़ें रखते हैं, लेकिन बाद में ये आपस में मिल जाते हैं, जिससे 'सामाजिक वाक्' (Social Speech) और 'आंतरिक वाक्' (Inner Speech) का निर्माण होता है। 3. नॉम चॉम्स्की के अनुसार बच्चों में भाषा सीखने की एक जन्मजात क्षमता होती है, जिसे 'भाषा अर्जन यंत्र' (Language Acquisition Device - LAD) कहा जाता है, और यह क्षमता पर्यावरणीय पुनर्बलन (Reinforcement) और सामाजिक अंतःक्रियाओं के बिना पूरी तरह से निष्क्रिय रहती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश की मृदा एवं कृषि विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'नवीन जलोढ़ मृदा' को 'खादर' (Khadar) कहा जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है, किंतु नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी पाई जाती है। 2. बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ चिकनी और भारी काली मिट्टी जैसी होती हैं, जो सूखने पर कठोर हो जाती हैं और जिनमें नमी धारण करने की अत्यधिक क्षमता होती है। 3. राज्य के पर्वतीय एवं तराई क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'राँड़' (Randh) और 'पंडुवा' (Parwa) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ होती हैं और उनमें रासायनिक उर्वरकों के बिना भी धान और गेहूँ की बंपर पैदावार होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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