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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम के आकलन एवं सतत-व्यापक मूल्यांकन (CCE)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम की शर्तें' (Conditions of Learning: मौखिक सूचना, बौद्धिक कौशल, संज्ञानात्मक रणनीतियाँ, मोटर कौशल, और दृष्टिकोण) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'बेसल गैंग्लिया' (Basal Ganglia), और 'सेरिबेलम' (Cerebellum) के बीच पदानुक्रमित कौशल अधिग्रहण, मोटर और संज्ञानात्मक समेकन (Consolidation), और फीडबैक प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा जॉन हैटी (John Hattie) के 'दृश्यमान शिक्षण' (Visible Learning) और प्रभावी फीडबैक के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-असेसमेंट ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Assessment Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Testing), स्व-मूल्यांकन (Self-assessment) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagné) का 'अधिगम की शर्तें' (Conditions of Learning) सिद्धांत विभिन्न प्रकार के अधिगम (मौखिक सूचना से लेकर संज्ञानात्मक रणनीतियों तक) को रेखांकित करता है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, विभिन्न प्रकार के कौशल जैसे बौद्धिक कौशल और संज्ञानात्मक रणनीतियाँ 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' द्वारा प्रबंधित होती हैं, जबकि मोटर कौशल 'बेसल गैंग्लिया' और 'सेरिबेलम' की सक्रियता पर निर्भर करते हैं। जॉन हैटी का 'दृश्यमान शिक्षण' (Visible Learning) और प्रभावी फीडबैक इन न्यूरल नेटवर्क्स को सुदृढ़ करते हुए छात्रों के आत्म-मूल्यांकन और संज्ञानात्मक समेकन को बढ़ावा देते हैं। अतः विकल्प (b) इस जटिल न्यूरो-शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) एवं समावेशी शिक्षा' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disabilities जैसे डिस्लेक्सिया, डिसकैल्कुलिया और डिसग्राफिया) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'ऑक्सिपिटो-टेम्पोरल जंक्शन' (Occipitotemporal Junction - Visual Word Form Area), 'इंट्रापैरिएटल सर्कस' (Intraparietal Sulcus - Numerosity Processing), और 'मोटर कॉर्टेक्स व सेरिबेलम' के बीच दृश्य-श्रव्य एकीकरण, संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण, और सूक्ष्म मोटर समन्वय की सक्रियण गतिकी, तथा रॉबर्ट स्कार्स और सैम्युअल किर्क के उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) सिद्धांतों के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-समावेशी अनुकूलित शिक्षाशास्त्र' (Neuro-Inclusive Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी रणनीतियों (Multi-sensory Structured Language/Math Approach), अनुकूलित मूल्यांकन व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'वैदिक शिक्षा की प्रमुख संस्थाओं और उपाधियों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राचीन वैदिक काल में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को उनकी शिक्षा की अवधि और वेदों के अध्ययन के स्तर के आधार पर विभिन्न उपाधियाँ दी जाती थीं, जैसे- एक वेद का अध्ययन करने वाले को 'स्नातक', दो वेदों का अध्ययन करने वाले को 'वसु', तीन वेदों का अध्ययन करने वाले को 'रुद्र', तथा चारों वेदों का अध्ययन करने वाले को 'आदित्य' कहा जाता था। 2. प्राचीन काल में समावर्तन संस्कार (Education Completion Ceremony) के बाद गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने वाले युवा स्नातक को 'विद्यार्थी' या 'स्नातक' कहा जाता था, और इस अवसर पर गुरु द्वारा छात्र को 'सत्यं वद, धर्मं चर' (सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो) का दीक्षांत उपदेश दिया जाता था, जो तैत्तिरीय उपनिषद में उल्लिखित है। 3. प्राचीन काल में महिलाओं की शिक्षा के संबंध में दो प्रकार की विदुषी महिलाएँ होती थीं- 'ब्रह्मवादिनी', जो आजीवन अविवाहित रहकर वेदों और दर्शन का उच्च अध्ययन करती थीं, तथा 'सद्योवधू', जो विवाह के बाद तक ही शिक्षा प्राप्त करती थीं और गृहस्थ जीवन में प्रवेश करती थीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस अवस्था में बालकों के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) का गुण विकसित हो जाता है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के रूप, आकार या रंग में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन या द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। 2. बच्चे वस्तुओं को उनके किसी एक गुण (जैसे केवल रंग या केवल आकार) के आधार पर वर्गीकृत करने की बजाय कई मानदंडों के आधार पर एक साथ छाँट सकते हैं, जिसे 'वर्गीकरण' (Classification) की क्षमता कहा जाता है। 3. इस अवस्था के दौरान बालक पूरी तरह से 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' में पारंगत हो जाते हैं, और उन्हें अपने तर्कों की पुष्टि के लिए प्रत्यक्ष या भौतिक रूप से सामने मौजूद वस्तुओं की कोई आवश्यकता नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'स्मृति और प्रग्रहण (Memory and Encoding) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, हर्बिंग एबिंगhaus (Hermann Ebbinghaus) द्वारा प्रतिपादित 'विस्मरण वक्र' (Forgetting Curve) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' के बीच अल्पकालिक स्मृति से दीर्घकालिक स्मृति में सूचना के समेकन (Memory Consolidation) की सक्रियण गतिकी, तथा रिचर्ड शिफ़्रिन (Richard Shiffrin) एवं रिचर्ड एटकिंसन (Richard Atkinson) द्वारा प्रतिपादित 'मल्टी-स्टोर मॉडल' (Multi-store Memory Model) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, अंतरालित पुनरावृत्ति (Spaced Repetition) रणनीतियों और विद्यार्थियों में दीर्घकालिक ज्ञान प्रतिधारण व संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास और संज्ञानात्मक निर्णय के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Stages of Moral Development) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC), 'एंटीरियर इंसुला' (Anterior Insula) और 'एपिडर्मल लिम्बिक सिस्टम' के बीच नैतिक दुविधाओं (Moral Dilemmas), सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों और भावनात्मक सहानुभूति के प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक यथार्थवाद बनाम नैतिक स्वायत्तता' (Moral Realism vs. Moral Autonomy) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मूल्य-आधारित शिक्षा और विद्यार्थियों में न्याय, परोपकार व तार्किक निर्णय क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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