BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

UPTET
5 views

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं शिक्षण विधि' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत' (Cognitive Development Theory: आत्मसातकरण, समंजन और equilibration की प्रक्रिया) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'पैरिएटल लोब' (Parietal Lobe), और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच स्कीमा निर्माण (Schema Formation), न्यूरोनल सिनैप्टिक छंटाई (Synaptic Pruning), और संज्ञानात्मक संतुलन की सक्रियण गतिकी, तथा लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के 'सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कन्स्ट्रक्टिविस्ट ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Constructivist Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सक्रिय ज्ञान निर्माण, तार्किक संरक्षण क्षमता व समग्र संज्ञानात्मक परिपक्वता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत बाल विकास का एक केंद्रीय स्तंभ है। न्यूरो-संज्ञानात्मक दृष्टिकोण से, जब बच्चा अपने पूर्व ज्ञान (Schema) में नई जानकारी को जोड़ता है (आत्मसातकरण) या उसमें संशोधन करता है (समंजन), तो मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी और न्यूरोनल नेटवर्क के पुनर्गठन द्वारा 'संतुलन' (Equilibration) स्थापित करते हैं। यह प्रक्रिया बच्चों में तार्किक सोच, संरक्षण की समझ और समग्र संज्ञानात्मक परिपक्वता के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो न्यूरो-कन्स्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी का आधार बनती है।
Share:

Related Questions

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम पठार (Plateaus of Learning)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, ए.डब्ल्यू. गिट्स (A.W. Staats) और आधुनिक न्यूरोसाइंस के 'संज्ञानात्मक थकान और न्यूरो-मेटाबॉलिक डिप्लेशन मॉडल' (Cognitive Fatigue and Neuro-metabolic Depletion Model) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'डॉसोटैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'एंटीरियर सिंग्युलेट कॉर्टेक्स' (ACC) और 'बेसल गैन्ग्लिया' (Basal Ganglia) के बीच ऊर्जा चयापचय (ATP depletion), न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटिलकोलाइन और डोपामाइन) की कमी, और कार्यशील स्मृति (Working Memory) ओवरलोड की सक्रियण गतिकी, तथा ब्रायन और हार्ter (Bryan & Harter) द्वारा प्रतिपादित 'अभ्यास वक्र की उत्तर-चरण सीमाबद्धता' (Hierarchical Habit-Formation Plateau) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, ब्रेक-इंटीग्रेटेड मल्टीसेंसरी कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Break-Integrated Multisensory Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक ऊर्जा पुनर्स्थापना, प्रेरणा संवर्धन व समग्र अधिगम दक्षता के पुनरुत्थान में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश के वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान 'दुधवा राष्ट्रीय उद्यान' लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों के विस्तृत तराई क्षेत्र में स्थित है, जिसे वर्ष 1977 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था। 2. उत्तर प्रदेश में 'प्रोजेक्ट टाइगर' के अंतर्गत कुल तीन प्रमुख टाइगर रिजर्व अधिकृत हैं - दुधवा टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (बिजनौर) और पीलीभीत टाइगर रिजर्व, तथा चौथा नया टाइगर रिजर्व रानीपुर (चित्रकूट) वन्यजीव विहार को घोषित किया गया है। 3. राज्य में सामाजिक वानिकी योजना (Social Forestry Scheme) की शुरुआत वर्ष 1979-80 में बंजर भूमि के पुनरुद्धार, वृक्षारोपण और ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन की मांग को पूरा करने के उद्देश्य से की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की शैलियाँ और कॉग्निटिव स्टाइल्स' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, हरमन विटकिन (Herman Witkin) द्वारा प्रतिपादित 'क्षेत्र-स्वतंत्र और क्षेत्र-आश्रित संज्ञानात्मक शैली' (Field-Independent and Field-Dependent Cognitive Styles) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'विजुअल-स्पेशियल नेटवर्क' (Visual-Spatial Network: विशेष रूप से दाहिना पैरिएटल लोब), 'डॉर्मोलेटेरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), और 'वेंट्रल विजुअल पाथवे' के बीच विश्लेषणात्मक अमूर्त प्रसंस्करण, वैश्विक प्रासंगिकता और बाहरी विधाओं से स्वतंत्रता की सक्रियण गतिकी, तथा डेविड कोल्ब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle: मूर्त अनुभव, चिंतनशील अवलोकन, अमूर्त अवधारणा और सक्रिय प्रयोग) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित अनुभवात्मक शिक्षाशास्त्र (Differentiated Experiential Constructivist Pedagogy) और विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलेपन, समस्या-समाधान अनुकूलन व समग्र वैचारिक समझ के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? उत्तर प्रदेश के लोक नृत्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'राई नृत्य' (Rai Dance) बुंदेलखंड क्षेत्र का एक अत्यंत प्रसिद्ध मयूर नृत्य शैली जैसा लोक नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और विवाह उत्सवों के दौरान मयूर के पंखों को धारण करके किया जाता है। 2. 'ढोला नृत्य' (Dhola Song-Dance) पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर आगरा, अलीगढ़ और मेरठ क्षेत्र) में अत्यधिक लोकप्रिय है, जो एक कथा-गायन (Ballad) शैली है और इसमें मुख्य रूप से राजा ढोला और मरूवाणी के प्रेम प्रसंगों का लोक-गायन किया जाता है। 3. 'चरकुला नृत्य' (Charkula Dance), जो ब्रज क्षेत्र का एक विशिष्ट लोक नृत्य है, में महिलाएँ अपने सिर पर रथ के पहिये पर रखे दर्जनों जलते हुए दीपकों (प्रज्वलित दीप-स्तंभ) को संतुलित करते हुए कठिन ताल पर नृत्य करती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास के महाजनपद काल के संदर्भ में, सोलह महाजनפदों (Sixteen Mahajanapadas) और उनके आधुनिक भौगोलिक क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मल्ल महाजनपद — आधुनिक गोरखपुर और देवरिया क्षेत्र (कुशीनगर और पावा) 2. कुरु महाजनपद — आधुनिक दिल्ली, मेरठ और हरियाणा का कुछ भाग (हस्तिनापुर) 3. पांचाल महाजनपद — आधुनिक रोहिलखंड क्षेत्र, बरेली, बदायूं और फर्रुखाबाद (अहिच्छत्र और कम्पिल) 4. चेदि महाजनपद — आधुनिक बुंदेलखंड क्षेत्र (शक्तिमती)
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.