जीन पियाजे
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'विशेष आवश्यकता वाले बालक और जेंडर संवेदनशीलता' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग के 'जेंडर स्कीमा सिद्धांत' और सैंड्रा बेम (Sandra Bem) द्वारा प्रतिपादित 'जेंडर स्कीमा थ्योरी' (Gender Schema Theory) के अंतर्गत मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC), 'टेम्पोपैरिएटल जंक्शन' (TPJ) और 'अमिगडाला' के बीच सांस्कृतिक रूढ़ियों का आंतरिककरण, सामाजिक-संवेगात्मक श्रेणीकरण और संज्ञानात्मक लचीलेपन की सक्रियण गतिकी, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) के 'नैतिक विकास के परिप्रेक्ष्य' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, जेंडर-समावेशी समतावादी शिक्षाशास्त्र (Gender-Inclusive Egalitarian Pedagogy) और विद्यार्थियों में पूर्वाग्रह-मुक्त सोच, तार्किक समता व समग्र सामाजिक-संवेगात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
सैंड्रा बेम के 'जेंडर स्कीमा सिद्धांत' (Gender Schema Theory) और कोहलबर्ग के संज्ञानात्मक विकास के दृष्टिकोण के अनुसार, बच्चे अपने सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश से जेंडर से जुड़ी मान्यताओं और रूढ़ियों को अपने संज्ञानात्मक ढांचे (Schema) में ढालते हैं। न्यूरो-संज्ञानात्मक स्तर पर, 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (vmPFC) और 'टेम्पोपैरिएटल जंक्शन' (TPJ) सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों और दूसरों के परिप्रेक्ष्य को समझने में मदद करते हैं। आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्षों में 'जेंडर-समावेशी समतावादी शिक्षाशास्त्र' (Gender-Inclusive Egalitarian Pedagogy) का उपयोग करके शिक्षक इन कठोर जेंडर स्कीमा को चुनौती दे सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलापन, जेंडर समता और पूर्वाग्रह-मुक्त सामाजिक व्यवहार का संवर्धन होता है।
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