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Indian Polity
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भारतीय संविधान में 'मौलिक कर्तव्य' (Fundamental Duties) किस देश के संविधान से लिए गए हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन द्वारा 1976 में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर सोवियत संघ से लिए गए थे।
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 352 में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति पूरे देश में एक साथ आपातकाल लागू करने के लिए बाध्य था, वह इसके किसी विशिष्ट भाग तक इसे सीमित नहीं कर सकता था।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, और यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा (Written Recommendation) प्राप्त होने के बाद ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा ही यह संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है, तथा अनुच्छेद 359 के तहत अन्य मूल अधिकारों के निलंबन के आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना अनिवार्य किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह निर्देश उन विशिष्ट नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है जिन्हें मूल संविधान में नहीं जोड़ा गया था, बल्कि बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
2. अनुच्छेद 45 में मूल रूप से यह प्रावधान था कि राज्य इस संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के भीतर सभी बालकों के लिए चौदह वर्ष की आयु पूरी होने तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेगा, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित करके प्रारंभिक शिक्षा को अनुच्छेद 21क के तहत एक मौलिक अधिकार बना दिया गया।
3. अनुच्छेद 50 के अंतर्गत राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक् करने के लिए राज्य कदम उठाएगा, और यह सिद्धांत शक्ति के पृथक्करण (Separation of Powers) के प्रशासनिक दर्शन पर आधारित है जो देश की शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किए जाने के उपरांत, राज्यों को पंचायती राज व्यवस्था के संबंध में कई विधायी अधिकार दिए गए हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत राज्यों को यह शक्ति दी गई है कि वे पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकें जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा इसके अंतर्गत ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में से सभी विषयों पर विधि निर्माण का अधिकार अनिवार्य रूप से राज्य सरकारों को सौंपना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है।
2. अनुच्छेद 243-H के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, किसी पंचायत को उसके द्वारा संग्रहित और विनियोजित किए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस के आरोपण और संग्रहण के लिए अधिकृत कर सकता है, तथा राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता अनुदान (Grants-in-aid) देने का प्रावधान भी कर सकता है।
3. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पांचवें वर्ष की समाप्ति पर, एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन करेगा, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को उन सिद्धांतों के बारे में संस्तुति करेगा जो पंचायतों और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण को विनियमित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान का कौन सा भाग 'आपातकाल' से है?
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भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति (Pardoning Power) तथा उसकी संवैधानिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति न्यायपालिका की न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूर्णतः बाहर है, क्योंकि यह राष्ट्रपति का एक अनन्य एवं पूर्ण स्वविवेककारी अधिकार है।
2. सुप्रीम कोर्ट के 'इEकेरुप्पा बनाम कर्नाटक राज्य' और 'शत्रुघ्न चौहान बनाम भारत संघ' जैसे ऐतिहासिक निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति की दया याचिका (Mercy Petition) पर निर्णय लेने में अत्यधिक और अकारण विलंब करना, मृत्युदंड पाए कैदी के मूल अधिकारों (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है, जिसके आधार पर उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद भी उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है।
3. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) की तुलना में राष्ट्रपति की अनुच्छेद 72 के तहत प्राप्त क्षमादान शक्ति दो प्रमुख मामलों में अधिक व्यापक है—प्रथम, राष्ट्रपति सेना न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड को क्षमा कर सकता है जबकि राज्यपाल नहीं; और द्वितीय, राष्ट्रपति मृत्युदंड के मामलों में भी क्षमादान दे सकता है जबकि राज्यपाल को मृत्युदंड को पूरी तरह माफ करने की शक्ति प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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