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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनात्मकता और divergent thinking (अपसारी चिंतन) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, जिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बौद्धिक संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN), 'कार्यकारी नियंत्रण नेटवर्क' (Executive Control Network - ECN) और 'सालियंस नेटवर्क' (Salience Network) के बीच लचीले संज्ञानात्मक नियंत्रण, वैचारिक विचलन (Idea Divergence) और नवल संयोजन (Novel Combination) की सक्रियण गतिकी, तथा ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (Preparation, Incubation, Illumination, Verification) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान आधारित शिक्षाशास्त्र और विद्यार्थियों में मौलिकता, प्रवाहशीलता तथा संज्ञानात्मक लचीलेपन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: सृजनात्मकता (Creativity) और अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) के न्यूरो-संज्ञानात्मक अध्ययन यह दर्शाते हैं कि मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN - जो दिवास्वप्न और विचारों के स्वतः सृजन से जुड़ा है) और 'कार्यकारी नियंत्रण नेटवर्क' (ECN - जो ध्यान और मूल्यांकन से जुड़ा है) के बीच गतिशील और लचीली अंतःक्रिया से ही मौलिक और नवीन विचारों का जन्म होता है। जिलफोर्ड का अपसारी चिंतन और ग्राहम वालेस के चार चरण (तैयारी, उष्मायन, प्रदीप्ति, और सत्यापन) इस न्यूरोलॉजिकल प्रक्रिया के साथ सटीक रूप से मेल खाते हैं। समावेशी शिक्षा में ऐसे शिक्षण शास्त्र का उपयोग विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक लचीलेपन और मौलिकता को बढ़ावा देता है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम पठार और मानसिक स्वास्थ्य' के संदर्भ में, आर्थर गेट्स (Arthur Gates) औरॉर्डन (Dean) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम के पठार' (Plateaus in Learning) के उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों—जैसे प्रेरणा की कमी, थकान, जटिल विषय-वस्तु और शिक्षण विधियों की अपूर्णता—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) और अब्राहम मैस्लो द्वारा समर्थित 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) के अंतर्गत 'पूर्ण रूप से कार्य करने वाले व्यक्ति' (Fully Functioning Person) की संकल्पना और मानसिक स्वास्थ्य के संवर्धन हेतु 'रक्षा तंत्र' (Defense Mechanisms) के इतर अपनाई जाने वाली 'सकारात्मक समायोजन रणनीतियों' (Positive Adjustment Strategies) के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के भौतिक विभाजनों और उनके अंतर्गत आने वाली प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण का पठारी प्रदेश (जिसे बुंदेलखंड का पठार भी कहा जाता है) प्राचीन काल के प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसकी मुख्य चट्टानें नीस (Gneiss) और ग्रेनाइट जैसी प्राचीन रवेदार चट्टानें हैं।
2. तराई क्षेत्र (Tarai Region) भाबर क्षेत्र के ठीक दक्षिण में स्थित एक संकीर्ण पट्टी है, जो महीन अवसादों (गाद और चीका) से बनी है और यहाँ की भूमि अत्यधिक नम, दलदली तथा घने जंगलों एवं लंबे घासों से आच्छादित होती है।
3. उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्र (गंगा-यमुना का मैदान) का ढाल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है, जिसके कारण राज्य की अधिकांश नगालैंड और मध्यवर्ती नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना और कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 (नौ) कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की भिन्न-भिन्न मृदा, तापमान और वर्षा की स्थिति को दर्शाते हैं।
2. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में मुख्य रूप से बलुई-दोमट और जलोढ़ मृदा पाई जाती है, जो गन्ने और गेहूँ की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है।
3. राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ चिकनी मिट्टी होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है और इन्हें जुताई के लिए अत्यधिक भारी वर्षा की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) और 'विशिष्ट बालकों की पहचान' के संदर्भ में, अमेरिकी मनोवैज्ञानिक सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा 1963 में पहली बार किस शब्द का प्रतिपादन किया गया था, जिसका उपयोग आज ऐसे बच्चों के लिए किया जाता है जो सामान्य बालकों की तुलना में बौद्धिक, शारीरिक, संवेगात्मक या सामाजिक रूप से इतने भिन्न होते हैं कि उन्हें अपनी विशिष्ट योग्यताओं और क्षमताओं का पूर्ण विकास करने के लिए विशेष शैक्षणिक प्रावधानों और सहायता सेवाओं की आवश्यकता होती है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'डिफ़िसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर' (ADHD) के 'डबल पाथवे मॉडल' (Double Pathway Model of ADHD: म (Sonuga-Barke) द्वारा प्रतिपादित कार्यकारी नियंत्रण विफलता और विलंबित सुदृढीकरण संवेदनशीलता) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डोसोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (DLPFC), 'वेंट्रल स्ट्रिएटम' (Ventral Striatum), और 'सेरिबैलम' (Cerebellum) के बीच आवेग नियंत्रण (Impulse Control), रिवार्ड प्रोसेसिंग असंतुलन (Reward Processing Imbalance), और मोटर अतिसक्रियता की सक्रियण गतिकी, तथा रसेल बार्कले (Russell Barkley) के 'एग्जीक्यूटिव फंक्शन्स एंड सेल्फ-रेगुलेशन मॉडल' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, स्ट्रक्चर्ड न्यूरो-बिहेवियरल पेडागोजी (Structured Neuro-behavioral Pedagogy) और विद्यार्थियों में स्व-विनियमित अधिगम, ध्यान नियंत्रण व समग्र तार्किक सहभागिता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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