त्वरित लिंक्स
UPTET
4 views
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम की शैलियों और संज्ञानात्मक रणनीतियों' के संदर्भ में, डेविड कोल्ब (David Kolb) द्वारा प्रतिपादित 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत वर्णित चार प्रमुख अधिगम शैलियों—'अभिसारी' (Converging), 'आत्मसातीकरण' (Assimilating), 'समायोजनकारी' (Accommodating), और 'अपसारी' (Diverging)—के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा एंथनी ग्रेगोरिया (Anthony Gregorc) द्वारा प्रतिपादित 'ग्रेगोरिया अधिगम शैली मॉडल' (Gregorc Mind Styles Model) के अंतर्गत मस्तिष्क के प्रक्रमण के दो प्राथमिक तरीकों—'मूर्त-अमूर्त' (Concrete-Abstract) धारणा और 'क्रमिक-यादृच्छिक' (Sequential-Random) व्यवस्था—के वैज्ञानिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक बहु-संवेदी कक्षा-कक्ष शिक्षण, विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत संज्ञानात्मक प्राथमिकताओं के निर्धारण में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह प्रश्न डेविड कोल्ब के 'प्रयोगात्मक अधिगम चक्र' और एंथनी ग्रेगोरिया के 'मस्तिष्क शैली मॉडल' के बीच के गहरे अंतर्संबंधों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। कोल्ब की 'अपसारी' (Diverging) शैली विद्यार्थियों को मूर्त अनुभवों और चिंतनशील अवलोकन के माध्यम से विभिन्न दृष्टिकोणों से स्थितियों को देखने में सक्षम बनाती है। वहीं, ग्रेगोरिया के मॉडल में 'अमूर्त-यादृच्छिक' (Abstract-Random) शैली अमूर्त विचारों को सहजता से ग्रहण करने और गैर-रेखीय, गतिशील वातावरण में सोचने से जुड़ी है। इन दोनों का समेकन आधुनिक समावेशी कक्षा-कक्ष में शिक्षार्थियों की विविध संज्ञानात्मक प्राथमिकताओं, अंतःवैयक्तिक कौशल और सृजनात्मक समस्या-समाधान क्षमताओं को पोषित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अन्य विकल्प तथ्यात्मक और सैद्धांतिक रूप से गलत हैं क्योंकि वे इन मॉडलों की मूल प्रकृति के विपरीत व्याख्या करते हैं।
Related Questions
→
कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) के दूसरे चरण यानी 'व्यक्तिवाद और विनिमय' (Individualism and Exchange) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से पुरस्कार प्राप्त करने और दंड से बचने की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर आधारित होता है, जिसे 'जैसी करनी वैसी भरनी' की भावना भी कहते हैं।
2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Interpersonal Relationships) अभिविन्यास में व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य दूसरों की नज़रों में aprobación (स्वीकृति) प्राप्त करना और सामाजिक रूप से स्वीकृत अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करना होता है।
3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतिम और उच्चतम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles) में व्यक्ति बाहरी नियमों या कानूनों की परवाह किए बिना अपने स्वयं के विवेक और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे कानून समाज के नियमों के विरुद्ध क्यों न हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विकास के सिद्धांत' (Principles of Development) के संदर्भ में, मानव विकास की विभिन्न अवस्थाओं—विशेषकर 'शैशवावस्था' (Infancy) और 'उत्तर बाल्यकाल' (Later Childhood)—के दौरान शारीरिक, संवेगात्मक और सामाजिक विकास की गतिशीलता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा वैज्ञानिक कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बच्चा नई जानकारी को अपने पूर्ववर्ती मानसिक ढाँचे (स्कीमा) में फिट करने का प्रयास करता है, तो इस प्रक्रिया को क्या कहा जाता है और यह किस अवस्था में अधिक प्रमुख होती है?
→
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बुद्धि के बहुआयामी सिद्धांतों' के संदर्भ में, हॉवर्ड गार्डनर (Howard Gardner) द्वारा प्रतिपादित 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) के अंतर्गत 'स्थानिक बुद्धि' (Spatial Intelligence), 'संगीतकीय बुद्धि' (Musical Intelligence), 'शारीरिक-गतिकी बुद्धि' (Bodily-Kinesthetic Intelligence), 'अंतर-वैयक्तिक बुद्धि' (Interpersonal Intelligence), और 'अंतः-वैयक्तिक बुद्धि' (Intrapersonal Intelligence) के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि के त्र-तंत्रीय सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) के अंतर्गत 'घटकीय/विश्लेषणात्मक बुद्धि' (Componential/Analytical Intelligence), 'अनुभवात्मक/सृजनात्मक बुद्धि' (Experiential/Creative Intelligence), और 'संदर्भगत/व्यावहारिक बुद्धि' (Contextual/Practical Intelligence) के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
→
उत्तर प्रदेश के खनिज संसाधनों, उनके प्राप्ति स्थलों और औद्योगिक उपयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में 'चूना पत्थर' (Limestone) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, विशेष रूप से गुरमा और कजराहट क्षेत्रों में, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सीमेंट उद्योग और रासायनिक कारखानों में किया जाता है।
2. 'बॉक्साइट' (Bauxite) जो एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क है, उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से बांदा और चंदौली जिलों में पाया जाता है, जबकि 'डोलोमाइट' का मुख्य उत्पादन बांदा और मिर्जापुर जिलों से होता है।
3. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के 'हवांग' (Hawaang) और 'घुघरी' क्षेत्रों में स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) पाए जाने की पुष्टि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा की गई है, जिससे यह राज्य के खनिज मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.