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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'विशिष्ट बालकों की शिक्षा' (Education of Exceptional Children) के संदर्भ में, निकोलास हbs (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण' (Ecological Approach) के अंतर्गत 'प्रोजेक्ट रेविटलाइजिंग प्रोजेक्ट' (Project Re-ED) की संकल्पना—जो बच्चों के सामाजिक-पारिस्थितिक तंत्र (परिवार, विद्यालय और समुदाय) को एकीकृत करने पर बल देती है—त तथा सैम्युएल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा प्रतिपादित 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disability) की अवधारणा और उसके उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) के वैज्ञानिक स्वरूप के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
निकोलास हॉब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण' (Ecological Approach) और 'Project Re-ED' यह मानते हैं कि समस्याग्रस्त या विशिष्ट बालकों का सुधार केवल नैदानिक कक्ष में नहीं, बल्कि उनके संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र (परिवार, विद्यालय और समुदाय) को जोड़कर किया जाना चाहिए। वहीं, सैम्युएल किर्क (Samuel Kirk) ने 'अधिगम अक्षमता' (Learning Disability) शब्द गढ़ा और बालकों की विशिष्ट योग्यताओं के आधार पर उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की रूपरेखा तैयार की। दोनों दृष्टिकोण मिलकर यह प्रमाणित करते हैं कि विशिष्ट बालकों के लिए वातावरणीय और संज्ञानात्मक दोनों पक्षों का एकीकरण आवश्यक है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व के मनोवैज्ञानिक और संरचनात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) द्वारा प्रतिपादित 'मनोविश्लेषण सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत 'इड' (Id - आनंद सिद्धांत पर आधारित अचेतन मन), 'इगो' (Ego - वास्तविकता सिद्धांत पर आधारित मध्यस्थ मन), और 'सुपरइगो' (Super-ego - नैतिक आदर्शवादी मन) के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा कार्ल जुंग (Carl Jung) द्वारा प्रतिपादित 'विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान' (Analytical Psychology) के अंतर्गत 'व्यक्तिगत अचेतन' (Personal Unconscious) और 'सामूहिक अचेतन' (Collective Unconscious) में निहित 'मूलरूपों' (Archetypes जैसे परसोना, एनिमा/एनिमस और शैडो) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, भावनात्मक नियमन (Emotional Regulation) और विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता व नैतिक विकास के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप, अपवाह तंत्र और खनिज संपदा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश के दक्षिण का पठारी क्षेत्र प्रायद्वीपीय पठार का उत्तर-पूर्वी विस्तार है, जिसके अंतर्गत ललितपुर, झाँसी, महोबा, बाँदा और सोनभद्र जिले आते हैं। इस क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ चिकनी और काली प्रकृति की होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की अत्यधिक क्षमता होती है।
2. उत्तर प्रदेश में तांबा (Copper) का मुख्य भंडार ललितपुर जिले के सोनराई क्षेत्र में पाया जाता है, जबकि यूरेनियम के निक्षेप भी इसी जिले से प्राप्त होते हैं।
3. सोनभद्र जिले में रिहंद नदी पर बनाए गए गोविंद बल्लभ पंत सागर बांध के कारण यहाँ उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा कृत्रिम जलाशय निर्मित हुआ है, तथा इस जिले में चूना पत्थर, कोयला और नॉन-प्लास्टिक फायर क्ले प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र' के अंतर्गत 'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की मुख्य विशेषताओं—जैसे 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning), 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking), 'संयोजनवादी तर्क' (Combinatorial Reasoning), और 'प्रस्तावनात्मक चिंतन' (Propositional Thought)—के मनोवैज्ञानिक, तार्किक तथा शैक्षिक निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'समावेशी शिक्षा और विशिष्ट बालकों के मनोवैज्ञानिक स्वरूप' के संदर्भ में, लुइस ब्रेल (Louis Braille) द्वारा विकसित 'ब्रेल लिपि' (Braille System) के छह-बिंदु कोड मैट्रिक्स (Six-dot Cell Matrix) की स्पर्शनीय न्यूरो-संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली और दृश्यबाधित विद्यार्थियों में स्पर्श संवेदन के माध्यम से मस्तिष्क के दृश्यक (Visual Cortex) के पुनरुपयोग (Cross-modal Plasticity) की प्रक्रिया, तथा सैम बार्नेट (Sam Barnett) और अन्य द्वारा विश्लेषित 'दृष्टिहीनता और श्रवणबाधित बालकों के समावेशन में सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन प्रमुख सिद्धांतों (अर्थात् बहुविध प्रस्तुति, बहुविध अभिव्यक्ति, और बहुविध जुड़ाव) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सुलभ अधिगम वातावरण के निर्माण और विद्यार्थियों में स्वायत्त ज्ञान निर्माण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार, जब बालक अपनी मौजूदा मानसिक संरचना (Schema) में बिना किसी बड़े बदलाव के नए अनुभव को व्यवस्थित कर लेता है, तो इस प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality) इस बात पर केंद्रित है कि बालक समाज के नियमों, सामाजिक व्यवस्था और दूसरों की स्वीकृति को बनाए रखने के लिए नैतिक निर्णय लेता है।
2. पियाजे की 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में बालक के भीतर निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning) और अमूर्त चिंतन की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) को समझने के लिए एक आवश्यक संज्ञानात्मक आधार प्रदान करती है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की अवस्थाएँ अपरिवर्तनीय और सार्वभौमिक होती हैं, और उनका क्रम हमेशा पूर्व-रूढ़िगत से रूढ़िगत तथा अंततः उत्तर-रूढ़िगत स्तर की ओर ही आगे बढ़ता है, जिसे पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों की तरह पीछे की अवस्था में नहीं लौटाया जा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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