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Indian Polity
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भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' के अंतर्गत 'बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्यों की संरक्षा' (Protection of States against external aggression and internal disturbance) के दायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अनुच्छेद के तहत यह संघ का कर्तव्य है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की संरक्षा करे, तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
- 2. 'आंतरिक अशांति' शब्द का मूल संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख था, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदलकर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) कर दिया गया था।
- 3. संघ को यह संवैधानिक दायित्व पूरा करने के लिए केवल राज्य सरकार की पूर्व सहमति से ही उस राज्य में सशस्त्र बलों को तैनात करने की शक्ति प्राप्त है, और वह राज्य की इच्छा के विरुद्ध ऐसा कदम नहीं उठा सकता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अनुच्छेद 355 के अनुसार, यह संघ का कर्तव्य है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की संरक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाई जाए। कथन 2 गलत है: 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को केवल अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल) में 'आंतरिक अशांति' के स्थान पर 44वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, न कि अनुच्छेद 355 में। अनुच्छेद 355 में आज भी 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द ही विद्यमान है। कथन 3 गलत है: संघ सरकार अपने संवैधानिक कर्तव्यों (विशेषकर अनुच्छेद 355 और 257) के तहत राज्यों की सहमति के बिना भी केंद्रीय सुरक्षा बलों या सेना को कानून व्यवस्था बनाए रखने या राज्य की सहायता के लिए तैनात कर सकती है; इसके लिए राज्यों की पूर्व सहमति अनिवार्य नहीं है।
Related Questions
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषाओं और राजनीतिक दलों की मान्यता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें विभिन्न संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में 'अंग्रेजी' और 'राजस्थानी' दोनों भाषाओं को अभी तक संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
2. भारतीय संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में तथा अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा का विशेष प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार संसद द्वारा विधि बनाकर जब तक अन्य उपबंध न किया जाए, तब तक सभी कार्यवाहियां केवल अंग्रेजी में ही होंगी।
3. निर्वाचन आयोग द्वारा किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा चुनावों या आम विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और इसके अतिरिक्त कम से कम चार अलग-अलग राज्यों से लोकसभा में कुल 4 सीटें भी जीते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों तथा उत्तरदायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है, किंतु वह राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है, या उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित संकल्प और लोकसभा द्वारा सहमत प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति के महाभियोग जैसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते इस आशय का प्रस्ताव लाने से कम से कम चौदह दिन पूर्व लिखित सूचना दी गई हो।
2. अनुच्छेद 74(1) के प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर "एक बार" पुनर्विचार करने की अपेक्षा कर सकता है और राष्ट्रपति पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा।
3. अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा, और यदि प्रधानमंत्री स्वयं संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह छह महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त किए बिना अपने पद पर बने रहने का संवैधानिक अधिकार रखता है, बशर्ते उसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) अनुच्छेद 6 के अंतर्गत पाकिस्तान से भारत प्रवासन करने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता के अर्जन की व्यवस्था की गई थी, जिसके तहत 1 जुलाई 1948 से पूर्व भारत आने वाले व्यक्तियों को स्वतः नागरिकता मिल जाती थी, जबकि उस तिथि के पश्चात आने वाले व्यक्तियों को छह महीने तक भारत में निवास करने के बाद निर्धारित अधिकारी के समक्ष पंजीकरण कराना अनिवार्य था।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत 'वंश द्वारा नागरिकता' (By Descent) के मूल प्रावधान के अनुसार 26 जनवरी 1950 के बाद या उसके पश्चात भारत से बाहर जन्मा व्यक्ति भारत का नागरिक तभी हो सकता था जब उसके जन्म के समय उसके पिता भारत सरकार के अधीन सेवा में हों, और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1992 द्वारा इस प्रावधान में संशोधन कर 'माता या पिता' दोनों में से किसी एक के भारतीय होने को आधार बनाया गया।
3. अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों पर कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद द्वारा वर्ष 2019 में पारित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पूर्व भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) की परिभाषा से छूट प्रदान की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India - CAG) के संवैधानिक प्रावधानों, अधिकारों तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन के लिए भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में audiencia (सुनवाई) का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे किसी भी परिस्थिति में मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) का पद ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था पर आधारित है, किंतु भारतीय CAG और ब्रिटिश CAG में मूलभूत अंतर यह है कि ब्रिटेन में CAG के प्राधिकरण के बिना लोकनिधि (Public Exchequer) से एक भी रुपया बाहर नहीं निकाला जा सकता (अर्थात वह संवितरण पर नियंत्रण रखता है), जबकि भारत में CAG का मुख्य कार्य लेखापरीक्षण (Audit) करना है, संवितरण पर पूर्व नियंत्रण रखना नहीं।
3. अनुच्छेद 148 के अनुसार CAG को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं ग्राउंड्स पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु CAG अपना पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद पर दोबारा नियुक्त होने के लिए पात्र (Eligible) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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टायफाइड और कालरा (हैजा) किसके विशिष्ट उदाहरण हैं?
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