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MPTET
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 के अनुसार, गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चे की गणितीयकरण की क्षमता का विकास करना है। इस संदर्भ में 'गणित का गणितीयकरण' करने से क्या तात्पर्य है?
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Detailed Explanation
NCF 2005 के अनुसार, विद्यालयी गणित का मुख्य लक्ष्य 'गणित का गणितीयकरण' है, जिसका अर्थ है कि बच्चे गणितीय ढर्रे पर सोचना सीखें, तार्किक निष्कर्ष निकालें, अमूर्त चिंतन करें और किसी भी समस्या का विश्लेषण करने के लिए गणितीय दृष्टिकोण का उपयोग करें। यह केवल सूत्रों को रटने या केवल गणना करने से कहीं अधिक व्यापक है।
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास' (Social Contract and Individual Rights Orientation)**—जिसे उस उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-conventional Morality) के स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून सामाजिक अनुबंध के रूप में लचीले होने चाहिए, और यदि कोई कानून समाज के बुनियादी अधिकारों या न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध जाता है, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से बदला जा सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक दृष्टिकोण, नैतिक तार्किकता (Moral Reasoning) और न्यायबोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'सामान्य बुद्धि या जी-कारक' (General Intelligence / g-factor)**—जिसे उस सार्वभौमिक, जन्मजात और अपरिवर्तनीय मानसिक ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया जाता है जो व्यक्ति के जीवन के सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों, तार्किक समस्याओं और संज्ञानात्मक गतिविधियों में समान रूप से सक्रिय रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अकादमिक योग्यताओं, मानसिक क्षमता के आकलन और व्यक्तिगत विभिन्नताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय अवस्था—**'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage)**—जिसे लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु के बीच परिभाषित किया जाता है, जहाँ बालक वस्तुओं और घटनाओं के वास्तविक, मूर्त और प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देता है तथा किस केंद्रीय मानसिक क्षमता—**'संरक्षण' (Conservation)**—(अर्थात यह समझ विकसित होना कि किसी वस्तु के भौतिक स्वरूप, आकार या रूप में परिवर्तन करने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है) को पूरी तरह से आत्मसात कर लेता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक वर्गीकरण, आनुक्रमिकता और व्यावहारिक गणितीय अवधारणाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, ब्रूनेर (Jerome Bruner) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के तीन चरणों—'क्रियात्मक अवस्था' (Enactive Stage), 'प्रतिबिम्बात्मक अवस्था' (Iconic Stage), और 'संकेतात्मक अवस्था' (Symbolic Stage)—के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक सटीक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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