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खिलजी वंश की स्थापना किसने की थी?

Detailed Explanation

जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 में खिलजी वंश की नींव रखी थी।
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अंतरिक्ष में 'अर्सा मेजर' (Ursa Major) क्या है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - सर्वोच्च न्यायालय, अनुच्छेद 124 से 147) तथा 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या उसके द्वारा दिए गए किसी आदेश या निर्णय का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब संसद इस आशय का कोई विशेष अधिनियम पारित करे। 2. 'न्यायिक पुनरावलोकन' की संकल्पना का प्रत्यक्ष उल्लेख मूल संविधान के अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 32 में स्पष्ट रूप से किया गया है, जिसके तहत उच्चतम न्यायालय को संघ या राज्यों के ऐसे किसी भी कानून को शून्य घोषित करने की शक्ति प्राप्त है जो संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन करते हैं। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि 'संविधान की सर्वोच्चता' और 'न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति' दोनों ही भारतीय संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का अभिन्न अंग हैं, जिन्हें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत किए जाने वाले संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से भी समाप्त या छीना नहीं जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights) और 'संविधान की संशोधन शक्ति' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967)' मामले में उच्चतम न्यायालय की 11-न्यायाधीशों की पीठ ने यह निर्णय दिया था कि संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 13(2) 'विधि' शब्द के अंतर्गत संविधान संशोधन अधिनियमों को भी शामिल करता है। 2. चौबीसवां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा संसद ने अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 368 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ के अंतर्गत कोई 'विधि' (Law) नहीं है, जिससे संसद को मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति मिल गई। 3. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में उच्चतम न्यायालय ने 24वें संविधान संशोधन की संवैधानिक वैधता को तो बरकरार रखा, किंतु साथ ही 'न्यायिक समीक्षा' और 'संविधान के बुनियादी ढाँचे (Basic Structure)' के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए यह स्पष्ट किया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों में संशोधन तो कर सकती है, किंतु संविधान के मूल स्वरूप को नष्ट नहीं कर सकती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत ने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' (Look East Policy) की शुरुआत कब की थी? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'उच्चतम न्यायालय के परामर्शदात्री अधिकारक्षेत्र' (Advisory Jurisdiction - Article 143) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उन्हें यह प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो लोक महत्व का है, तो वे उस प्रश्न को विचार के लिए उच्चतम न्यायालय के पास भेज सकते हैं और न्यायालय ऐसी किसी भी संदर्भिका (Reference) पर राष्ट्रपति को अपनी राय देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। 2. उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई परामर्शदात्री राय न तो एक न्यायिक निर्णय होती है और न ही यह राष्ट्रपति या सरकार पर बाध्यकारी होती है, तथा न ही यह देश के अन्य अधीनस्थ न्यायालयों के लिए एक पूर्व दृष्टांत (Precedent) के रूप में प्रवर्तनीय होती है। 3. यदि कोई मामला संविधान लागू होने से पूर्व की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार के दस्तावेजों से उत्पन्न विवाद से संबंधित है, तो ऐसे मामलों में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए परामर्श पर अपनी राय देना अनिवार्य (Compulsory) कर दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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