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बंगाल विभाजन के समय भारत का वायसराय कौन था?

Detailed Explanation

लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल विभाजन की घोषणा की थी।
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स्वराज पार्टी की स्थापना किसने की थी? बीबी का मकबरा किस काल से संबंधित माना जाता है? अशोक के अधिकांश शिलालेख किस लिपि में उत्कीर्ण हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा, इसके संवैधानिक संशोधनों और न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के मूल पाठ में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) आधार शामिल था, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से इस शब्द को हटाकर इसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को अंतःस्थापित किया गया, और यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति ऐसी उद्घोषणा केवल तभी कर सकते हैं जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इसका लिखित निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए। 2. 'मिनवा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की न्यायिक समीक्षा पूरी तरह से वर्जित है, और यदि राष्ट्रपति ने युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर आपातकाल घोषित कर दिया है, तो न्यायालय यह जाँच नहीं कर सकता कि इस निर्णय के पीछे कोई दुर्भावना (Malafide) थी या नहीं। 3. 'ए.डी.एम. जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ल (1976)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी करते हुए, 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह वैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी संविधान के 'अनुच्छेद 20' (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और 'अनुच्छेद 21' (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की स्थापना, शक्तियों और इसके विधिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना वर्ष 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन के लिए की गई थी, और यह भारत का ऐसा पहला सांविधिक निकाय है जिसे पर्यावरण संबंधी मुकदमों की सुनवाई के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के सख्त नियमों का पालन करने से छूट प्राप्त है। 2. NGT अधिनियम, 2010 के प्रावधानों के अनुसार, अधिकरण को पर्यावरण से जुड़े मामलों में 'सख्त दायित्व' (Strict Liability) के सिद्धांत के आधार पर मुआवजा देने और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों या व्यक्तियों को पर्यावरण क्षतिपूर्ति का निर्देश देने की शक्ति प्राप्त है, किंतु यह अधिकरण 'वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980' और 'लोक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991' के अंतर्गत आने वाले मामलों पर विचार करने के लिए विधिक रूप से अधिकृत नहीं है। 3. NGT के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार (Award) के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में ही दाखिल की जा सकती है, और अधिकरण के निर्णय को किसी भी उच्च न्यायालय (High Court) के समक्ष रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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