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Civil services
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सहकारी समितियों को संवैधानिक संरक्षण और दर्जा किस संशोधन द्वारा दिया गया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
97वें संविधान संशोधन (2011) द्वारा सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - अनुच्छेद 51A) तथा उससे संबंधित 'वर्मा समिति' (Verma Committee) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को संविधान में शामिल करने की अनुशंसा करने वाली स्वर्ण सिंह समिति (1976) ने मूल रूप से कर अदायगी (Payment of Taxes) को भी नागरिकों का एक अनिवार्य मूल कर्तव्य बनाने की सिफारिश की थी, जिसे इंदिरा गांधी सरकार द्वारा 42वें संविधान संशोधन अधिनियम में शामिल कर लिया गया था।
2. 'वर्मा समिति' (Committee on Teaching of Fundamental Duties of Citizens, 1999) का गठन मूल कर्तव्यों के प्रति जागरूकता फैलाने और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कानूनी प्रावधानों की पहचान करने हेतु किया गया था, और इस समिति ने सिफारिश की थी कि राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अनादर को रोकने के लिए 'भारत के राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण अधिनियम, 1971' पहले से ही प्रभावी है।
3. स्वर्ण सिंह समिति की मूल सिफारिशों में यह प्रावधान भी शामिल था कि संसद को ऐसे किसी भी कानून या विधियों को बनाने का अधिकार होना चाहिए जो किसी मूल कर्तव्य के पालन न करने पर दंड या शास्ति (Penalty or Punishment) आरोपित करे, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम में स्वीकार कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) तथा इसके अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त 'स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार' को प्रभावी रूप से लागू करने तथा पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए की गई थी, और यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं एवं साक्ष्य नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य है।
2. अधिकरण के Chairperson (अध्यक्ष) या न्यायिक सदस्य (Judicial Member) के रूप में केवल उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहा हो, अथवा किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो, तथा इसके विशेषज्ञ सदस्यों (Expert Members) के पास पर्यावरण विज्ञान, वानिकी, या संबंधित क्षेत्रों में उच्च शैक्षणिक योग्यता और कम-से-कम पंद्रह वर्ष का व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों से व्यथित कोई भी व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध नब्बे दिनों की अवधि के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि इस अधिकरण के आदेशों के न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अधिकार केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पास निहित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' (Biological Diversity Act, 2002) और इसके अंतर्गत स्थापित सांविधिक निकायों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए त्रि-स्तरीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA), राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियां' (BMC) का गठन किया जाता है।
2. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है, और यह देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैव संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभों के न्यायसंगत व निष्पक्ष बंटवारे (ABS) को विनियमित करने वाला सर्वोच्च विधिक निकाय है।
3. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत प्रत्येक स्थानीय निकाय को अपने अधिकार क्षेत्र में जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) का गठन करना अनिवार्य किया गया है, जिनका मुख्य कार्य स्थानीय लोगों के परामर्श से 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करना है, जिसमें औषधीय पौधों और पारंपरिक ज्ञान का प्रलेखन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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