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बंगाल विभाजन किस वर्ष रद्द किया गया था?

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1911 में दिल्ली दरबार के दौरान किंग जॉर्ज पंचम द्वारा विभाजन रद्द किया गया था।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय आम परिसंचरण' (Oceanic General Circulation) और 'अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन' (AMOC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. AMOC अटलांटिक महासागर में संचालित होने वाली एक प्रमुख थर्मोहलाइन (Thermomohaline) धारा प्रणाली है, जो भूमध्यरेखीय क्षेत्रों से उष्ण और नम जल को उत्तर की ओर (उत्तरी अटलांटिक) ले जाती है और ठंडे, सघन जल को गहराई में दक्षिण की ओर वापस भेजती है। 2. उत्तरी अटलांटिक महासागर में ग्रीनलैंड के पिघलते हुए हिमनदों और अत्यधिक वर्षा के कारण बड़े पैमाने पर मीठे (अलवण) जल का प्रवेश AMOC की तीव्रता को बढ़ाने का कार्य करता है, जिससे यूरोप में तापमान में भारी वृद्धि होती है। 3. हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से यह संकेत मिला है कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापन के कारण AMOC अपनी सुझाई गई गति से कमजोर हो रहा है, जिसके पूरी तरह से ठप होने पर उत्तर-पश्चिमी यूरोप में गंभीर शीतलन (Severe Cooling) और दक्षिण अमेरिकी तथा अफ्रीकी मानसून प्रणालियों में भारी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 'इंडिया फाउंडेशन' द्वारा आयोजित '9वें हिंद महासागर सम्मेलन (IOC 2026)' की मुख्य थीम क्या रखी गई है? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ' (Pardoning Powers - Article 72) तथा राज्यपाल की शक्तियों (Article 161) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, जहाँ दंड या दंडादेश किसी ऐसे विषय से संबंधित है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, या सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिया गया है, या मृत्युदंड (Death Sentence) का मामला है। 2. राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) और राष्ट्रपति की शक्ति (अनुच्छेद 72) के बीच एक मुख्य अंतर यह है कि राज्यपाल को सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के संबंध में कोई क्षमादान शक्ति प्राप्त नहीं है, और साथ ही राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) या निरस्त नहीं कर सकता है, यद्यपि वह अन्य मामलों में दंडादेश का लघुकरण या परिहार कर सकता है। 3. 'एकीकरण और न्यायिक समीक्षा' के सिद्धांतों के तहत, राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा क्षमादान याचिकाओं पर लिए गए निर्णयों को देश के किसी भी न्यायालय में किसी भी परिस्थिति में चुनौती नहीं दी जा सकती है, क्योंकि यह पूरी तरह से कार्यपालिका की एक अनन्य (Exclusive) और पूर्ण विवेकाधीन शक्ति है जिस पर न्यायिक पुनरावलोकन लागू नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' (कुछ वर्गों से संबंधित विशेष उपबंध - अनुच्छेद 330 से 342A) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग' (National Commission for Scheduled Castes) और 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान में अनुच्छेद 338 के तहत अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए एक ही 'विशेष अधिकारी' (Special Officer) की नियुक्ति का प्रावधान था जिसे 'अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आयुक्त' कहा जाता था। 2. 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से अनुच्छेद 338 को विभाजित किया गया तथा एक नए अनुच्छेद 338A के तहत 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) का गठन किया गया, जिससे एससी और एसटी के लिए दो अलग-अलग सांविधिक निकाय अस्तित्व में आए। 3. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) दोनों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होती हैं, और ये दोनों निकाय अपनी वार्षिक रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को सौंपते हैं, जिन्हें संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपात की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के वास्ते 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, तथा राष्ट्रपति द्वारा ऐसी घोषणा तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा लिखित रूप में संघ के प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों का निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए। 2. राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उसके अनुमोदन की तिथि से एक महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा वह एक महीने की समाप्ति पर स्वतः समाप्त हो जाएगी। 3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, और अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अन्य मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए न्यायालयों में जाने के अधिकार को निलंबित कर सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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