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हर्षवर्धन ने किस स्थान पर बौद्ध धर्म की महायान शाखा के सिद्धांतों के प्रचार के लिए एक भव्य सभा बुलाई थी?

Detailed Explanation

हर्षवर्धन ने 643 ईस्वी में कन्नौज में एक विशाल बौद्ध सभा का आयोजन किया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 78' के अंतर्गत 'प्रधानमंत्री के कर्तव्य' तथा राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच संवाद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 78 के तहत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के कार्यकलाप और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय (Decisions) राष्ट्रपति को संसूचित करे। 2. राष्ट्रपति द्वारा संघ के प्रशासन के कार्यकलाप और विधान के प्रस्तावों से संबंधित जो भी जानकारी मांगी जाए, प्रधानमंत्री उसे देने के लिए बाध्य है, भले ही मंत्रिपरिषद ने उस विशिष्ट विषय पर अभी तक कोई औपचारिक निर्णय या विचार न किया हो। 3. यदि किसी मंत्री ने किसी विषय पर कोई निर्णय ले लिया है, जिस पर मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो राष्ट्रपति के अपेक्षा करने पर प्रधानमंत्री को उस विषय को मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करना होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'अनुच्छेद 19' द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकारों तथा उन पर लगाए जाने वाले 'युक्तियुक्त प्रतिबंधों' (Reasonable Restrictions) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु राज्य को इस अधिकार पर 'व्यावसायिक या तकनीकी अर्हताओं' को अनिवार्य बनाने तथा किसी व्यापार या कारोबार को पूर्णतः या भागतः राज्य द्वारा संचालित करने का अधिकार विधि बनाने की शक्ति प्रदान करता है। 2. अनुच्छेद 19(2) से 19(6) तक के प्रावधानों के तहत इन स्वतंत्रताओं पर लगाए जाने वाले सभी 'युक्तियुक्त प्रतिबंध' केवल और केवल संसद द्वारा बनाई गई विधियों के माध्यम से ही आरोपित किए जा सकते हैं, और राज्य के प्रशासनिक आदेशों (Executive Orders) द्वारा नागरिकों की इन स्वतंत्रताओं को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। 3. वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक 'के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ' (K. S. Puttaswamy v. Union of India) के नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सर्वसम्मत निर्णय में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया था कि निजता का अधिकार (Right to Privacy) अनुच्छेद 19 के विभिन्न खंडों के अंतर्गत निहित स्वतंत्रताओं का एक हिस्सा मात्र है, और इसे किसी भी स्थिति में एक स्वतंत्र मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और सैन्य सुधारों के अंतर्गत 'इकता प्रणाली' (Iqta System) तथा 'दाग और हुलिया' पद्धति के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इकता प्रणाली एक प्रकार की भू-राजस्व सम्वर्तन (assignment) व्यवस्था थी, जिसे सुल्तानों द्वारा अपने सैन्य कमांडरों और अधिकारियों को वेतन के रूप में किसी विशेष क्षेत्र से राजस्व एकत्र करने के अधिकार के रूप में प्रदान किया जाता था, और सल्तनत काल के प्रारंभिक चरण में ये इकता पूरी तरह से आनुवंशिक (hereditary) होते थे। 2. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को अधिक कुशल और अनुशासित बनाने के लिए घोड़ों को दागने की 'दाग' प्रथा और सैनिकों के व्यक्तिगत विवरण दर्ज करने की 'हुलिया' पद्धति की शुरुआत की थी, ताकि घोड़ों की अदला-बदली और फर्जी सैनिकों की भर्ती जैसी कुप्रथाओं को रोका जा सके। 3. सल्तनत काल में 'मुक्ति' या 'वालिया' (Iqtadars) के रूप में जाने जाने वाले इकता धारकों का मुख्य कर्तव्य अपने क्षेत्र से भू-राजस्व एकत्र करना और सुल्तान की आवश्यकता पड़ने पर सैन्य सहायता प्रदान करना था, किंतु उन्हें उस क्षेत्र के किसानों से प्रत्यक्ष रूप से कर निर्धारण करने की कोई कानूनी शक्ति प्राप्त नहीं थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? दिल्ली में 'दीनपनाह' नामक शहर की स्थापना किस शासक ने की थी? भारतीय कला, संस्कृति और प्राचीन इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध धर्म की महायान (Mahayana) और वज्रयान (Vajrayana) शाखाओं के विकास तथा दार्शनिक मान्यताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महायान बौद्ध धर्म में बुद्ध को एक अलौकिक शक्ति और भगवान के रूप में पूजे जाने की परंपरा शुरू हुई, तथा इसमें 'बोधिसत्व' की अवधारणा का उदय हुआ, जिसमें वे व्यक्ति जो स्वयं निर्वाण प्राप्त करने के योग्य हैं, अन्य जीवों के उद्धार के लिए अपनी मुक्ति को स्थगित कर देते हैं। 2. वज्रयान शाखा, जो मुख्य रूप से गुप्त काल के उत्तरार्ध और पाल काल के दौरान पूर्वी भारत (विशेषकर बंगाल और बिहार) में विकसित हुई, ने तांत्रिक अनुष्ठानों, मंत्रों, मुद्राओं और मंडल (Mandala) के प्रयोग को मुक्ति प्राप्ति के प्राथमिक साधन के रूप में मान्यता दी। 3. बौद्ध धर्म की शून्यवाद (Madhyamaka) विचारधारा के संस्थापक नागार्जुन थे, जिन्होंने यह प्रतिपादित किया कि समस्त वस्तुएं और धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) के कारण स्वभावतः शून्य (स्वयं के स्वतंत्र अस्तित्व से रहित) हैं, और इस दार्शनिक दृष्टिकोण को महायान बौद्ध मत का वैचारिक आधार माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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