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"मैंने राजनीति का प्रथम पाठ सुरेंद्रनाथ बनर्जी के चरणों में पढ़ा" - यह कथन किस राजनेता का है?

Detailed Explanation

सुभाष चंद्र बोस ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी के प्रभाव को स्वीकार करते हुए यह कथन कहा था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत यह उपबंध किया गया है कि राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह नीति निर्देशक तत्व प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) होने के कारण किसी भी नागरिक द्वारा इसके उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय में प्रवर्तित कराया जा सकता है। 2. गोवा राज्य भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 (Portuguese Civil Code) के रूप में एक समान पारिवारिक कानून वर्तमान में भी लागू है, जो धार्मिक संप्रदायों के आधार पर भिन्न होने के बजाय अधिकांश नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। 3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे शाहबानो मामला, 1985 और सरला मुद्गल मामला, 1995) में समय-समय पर विधायिका और कार्यपालिका को यह निर्देश दिया है कि वे संविधान के अनुच्छेद 44 के उद्देश्यों को साकार करने के लिए देश में एक समान नागरिक संहिता को लागू करने हेतु शीघ्र आवश्यक कदम उठाएं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर ठंडी जलधाराओं के बहने का क्या परिणाम होता है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत राज्यों में आपातकालीन प्रावधानों और उनकी संवैधानिक सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत यह संघ की यह कर्तव्य बताया गया है कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है। 2. राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की उद्घोषणा के पश्चात राज्य विधानसभा को या तो तुरंत विघटित कर दिया जाता है या निलंबित (Suspend) कर दिया जाता है, किंतु संसद द्वारा इस उद्घोषणा के दोनों सदनों से अनुमोदित होने से पूर्व राज्य विधानसभा को पूर्णतः विघटित नहीं किया जा सकता है। 3. एस.आर. बोम्मई वाद (1994) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा का न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) किया जा सकता है, और यदि न्यायालय को यह संतुष्टि हो जाती है कि उद्घोषणा का आधार अपर्याप्त या दुर्भावनापूर्ण था, तो न्यायालय विघटित विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है और निलंबित सरकार को बहाल कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? दौलताबाद किला (विस्तार) किस शासक से संबंधित है? भारतीय अर्थव्यवस्था एवं लोक वित्त के संदर्भ में, 'सार्वजनिक ऋण प्रबंधन' (Public Debt Management) और ट्रेजरी बिल (Treasury Bills) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ट्रेजरी बिल (T-Bills) भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अल्पकालिक मौद्रिक उपकरण (Short-term money market instruments) हैं, जिन्हें वर्तमान में तीन अवधियों— 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन के लिए जारी किया जाता है, और ये शून्य-कूपन बांड (Zero-coupon bonds) के रूप में कार्य करते हैं जिन पर कोई निश्चित ब्याज दर नहीं दी जाती बल्कि इन्हें अंकित मूल्य से छूट पर बेचा जाता है। 2. भारत में केंद्र सरकार के सभी प्रकार के आंतरिक और बाह्य ऋणों के प्रबंधन की वैधानिक जिम्मेदारी और कार्यकारी नियंत्रण सीधे तौर पर 'भारतीय रिजर्व बैंक' (RBI) के पास निहित है, और इसमें केंद्र सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती है। 3. 'अर्थोपाय अग्रिम' (Ways and Means Advances - WMA) केंद्र और राज्य सरकारों को आरबीआई द्वारा प्रदान की जाने वाली एक अस्थायी ऋण सुविधा है, जिसका उपयोग उनकी प्राप्तियों और भुगतानों के बीच के अस्थायी असंतुलन (Cash flow mismatches) को पाटने के लिए किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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