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Indian Polity
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राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहते हैं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण अधिकार तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने की स्थिति में अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल अपनी इस स्वविवेकिए शक्ति का प्रयोग मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति के बिना भी कर सकता है और कुछ विशिष्ट मामलों (जैसे समान उपबंध वाले विधेयक को प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व संस्वीकृति आवश्यक हो) में राष्ट्रपति के निर्देशों के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता है।
2. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के पुनरारंभ होने के छह सप्ताह के भीतर विधानमंडल द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, और यदि विधानमंडल इस अवधि के भीतर संकल्प द्वारा इसका अनुमोदन नहीं करता है, तो वह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, तथा राज्यपाल अपनी इस अध्यादेश निर्माण की शक्ति का प्रयोग तब भी कर सकता है जब राज्य विधानमंडल का केवल एक सदन (जैसे विधानसभा या विधान परिषद) सत्र में हो।
3. झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 164 के खंड (1) के परंतुक के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि इन राज्यों में आदिम जातियों और पिछड़ी जातियों के कल्याण का भारसाधक एक पृथक मंत्री होगा, जिसके प्रभार के अंतर्गत जनजातीय कल्याण का विषय अनिवार्य रूप से रखा जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह पद धारण करता है जो राष्ट्रपति को उपयुक्त लगे, किंतु महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे मतदान करने का कोई अधिकार नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित वारंट द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
3. सीएजी (CAG) का पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय का पात्र वह व्यक्ति हो सकता है, बशर्ते कि उसने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल से विशेष अनुमति प्राप्त कर ली हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, विशेषकर अध्यादेश निर्माण (अनुच्छेद 213) और मुख्यमंत्री के संवैधानिक उत्तरदायित्वों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपनी इच्छा से स्वतंत्र रूप से कर सकता है और इसके लिए मंत्रिपरिषद की सलाह अनिवार्य नहीं होती है।
2. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधान के लिए प्रस्ताव राज्यपाल को संसूचित करे, तथा यदि राज्यपाल किसी ऐसे विषय पर जानकारी मांगता है जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो मुख्यमंत्री उसे प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है।
3. राज्य विधानसभा में बहुमत खोने के पश्चात यदि मुख्यमंत्री सदन में विश्वास मत प्राप्त करने से पूर्व त्यागपत्र देने से इंकार कर देता है, तो राज्यपाल मंत्रिपरिषद को बर्खास्त करने का अधिकार रखता है, और राज्यपाल के इस स्वविवेकपूर्ण निर्णय को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसने प्रक्रिया का उल्लंघन किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 के खंड (2) के अनुसार राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो भाग-III द्वाराप्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, तथा इस खंड के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अतिरिक्त केवल अध्यादेश, आदेश और उप-विधियाँ ही शामिल हैं, किंतु किसी भी संवैधानिक संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Act) को इस अनुच्छेद के अधीन 'विधि' नहीं माना जा सकता था।
2. उच्चतम न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें मूल अधिकार भी शामिल हैं, बशर्ते वह संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
3. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की अनन्य (Exclusive) अधिकारिता प्राप्त है, जिसका अर्थ यह है कि किसी भी मूल अधिकार के हनन की स्थिति में कोई भी व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय की शरण ले सकता है, और उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति केवल तभी प्राप्त होती है जब पीड़ित व्यक्ति पहले उच्च न्यायालय में अपील करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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ब्रिटिश भारत में संवैधानिक विकास के प्रारंभिक चरणों के अंतर्गत 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' (Pitt's India Act, 1784) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पहली बार पृथक किया गया, तथा राजनीतिक मामलों के अधीक्षण और नियंत्रण के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल के छह सदस्यों वाले एक नए निकाय 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई, जिससे ब्रिटिश सरकार को भारत में कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी सभी मामलों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त हो गया।
2. गवर्नर-जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या जो 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' के तहत चार निर्धारित की गई थी, उसे पिट्स इंडिया एक्ट के माध्यम से घटाकर तीन कर दिया गया, ताकि गवर्नर-जनरल को निर्णय लेने में विशेष परिस्थितियों में निर्णायक मत (Casting Vote) के माध्यम से अधिक प्रशासनिक सुगमता और स्थायित्व मिल सके।
3. इस अधिनियम के माध्यम से भारत में पहली बार द्वैध शासन प्रणाली (System of Dual Government) की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसके तहत कंपनी के व्यावसायिक मामलों का प्रबंधन 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' (Court of Directors) के हाथों में छोड़ दिया गया, जबकि राजनीतिक मामलों का प्रबंधन 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' के अधीन कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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