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Indian Polity
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भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे?

Detailed Explanation

डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे और वे इस पद पर सबसे लंबे समय (1950-1962) तक रहे।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination) हो जाएगी, और यह नियम युद्ध काल या शांति काल दोनों ही परिस्थितियों में समान रूप से लागू होता है। 2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीयकरण' (Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है कि आवेदक किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय नागरिकों को देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया हो। 3. संसद को संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत यह अनन्य शक्ति प्राप्त है कि वह नागरिकता के अर्جين और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में विधि का विनियमन कर सकती है, किंतु इस शक्ति के प्रयोग के माध्यम से संसद किसी भी व्यक्ति को मौलिक अधिकारों की तरह भू-तक्षी (Retrospective) प्रभाव से नागरिकता से वंचित नहीं कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Ordinance-making power) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति संसद की विधि निर्माण की शक्ति के समतुल्य होती है, किंतु राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी कर सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। 2. राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश संसद की पुनर्सवेतन बैठक (Reassembly) होने के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, बशर्ते उससे पूर्व दोनों सदनों द्वारा उसे अस्वीकार करने वाला संकल्प पारित न कर दिया गया हो। 3. सुप्रीम कोर्ट के 'डी.सी. वाधवा वाद' (1987) के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों का बार-बार पुनः प्रख्यापन (Repromulgation) करना संवैधानिक धोखाधड़ी (Constitutional Fraud) की श्रेणी में आता है और यह न्यायालय के न्यायिक पुनरावलोकन के दायरे से बाहर है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और अंग्रेजी भाषा को इस अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का उपबंध किया गया है, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संविधान लागू होने के पंद्रह वर्ष की अवधि (अर्थात 1965 तक) तक सभी सरकारी कार्यों के लिए केवल अंग्रेजी का ही प्रयोग किया जाना अनिवार्य था और हिंदी का प्रयोग प्रतिबंधित था। 3. वर्ष 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसे 'दल-बदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) कहा जाता है, और इसके अंतर्गत यदि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई निर्वाचित सदस्य अपने राजनीतिक दल की इच्छा के विरुद्ध सदन में मतदान करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है और दल द्वारा पंद्रह दिन के भीतर उसकी इस कृत्य को माफ नहीं किया जाता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में कुल 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इसमें अंग्रेजी भाषा को शामिल नहीं किया गया है। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा के संबंध में उपबंध किए गए हैं, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा, तथा इसके साथ ही संविधान में अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए संसद को विधि बनाने की शक्ति दी गई थी, किंतु न्यायालयों की भाषा के संबंध में विशेष उपबंध अनुच्छेद 348 में किए गए हैं। 3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, 'दल-बदल के आधार पर अयोग्यता के उपबंध' से संबंधित है, और इसके तहत किसी सदस्य की अयोग्यता पर निर्णय लेने की अंतिम शक्ति सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) में निहित होती है, जिसके न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) का अधिकार वर्ष 1992 के 'किहोटो होलोहन वाद' के पश्चात समाप्त कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संसद की विधायी प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं; और जब लोकसभा द्वारा पारित कोई धन विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है, तो राज्यसभा को उसे अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के लोकसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत वर्णित 'वित्त विधेयक श्रेणी-I' (Financial Bill Category-I) में ऐसे विषय शामिल होते हैं जिनका संबंध अनुच्छेद 110 में उल्लिखित सभी या किसी भी विशिष्ट मामले से होता है, और ऐसे विधेयक को दोनों सदनों में से किसी में भी पुनःस्थापित किया जा सकता है, किंतु इसे राज्यसभा में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश (Prior Recommendation) आवश्यक नहीं होती है, केवल लोकसभा में पारित होने से पहले राष्ट्रपति की अनुमति अनिवार्य होती है। 3. साधारण विधियों या वित्तीय विधेयकों (श्रेणी-I और श्रेणी-II) के पारित होने की प्रक्रिया में उत्पन्न गतिरोध को दूर करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का प्रावधान किया गया है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, किंतु धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के मामलों में संयुक्त बैठक बुलाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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