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Indian Polity
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संविधान संशोधन की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में वर्णित है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अनुच्छेद 368 संविधान में संशोधन करने की शक्ति और प्रक्रिया का वर्णन करता है।
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) में वर्णित 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुता' के आदर्शों तथा इसके विधिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्शों को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर शामिल किया गया है, जबकि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के आदर्श को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है।
2. 'बेरूबारी यूनियन मामले' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है और संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है।
3. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को बदलते हुए यह निर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का भाग है, किंतु इसके मूल ढांचे (Basic Structure) को क्षति पहुँचाए बिना इसमें संशोधन किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों, दायित्वों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के प्रावधानों के अंतर्गत महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद की किसी भी समिति का सदस्य बनाए जाने पर मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) संसद की 'लोक लेखा समिति' (Public Accounts Committee) के मुख्य मार्गदर्शक, मित्र और दार्शनिक के रूप में कार्य करता है, तथा संघ के लेखा-परीक्षण प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाया जाता है।
3. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपने पद से सेवा निवृत्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य लाभ के पद पर या नियोजन के पात्र नहीं होता है, जबकि महान्यायवादी के लिए निजी विधिक प्रैक्टिस करने पर संविधान द्वारा पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV-A के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और प्रारंभ में संविधान में कुल 10 मूल कर्तव्य शामिल किए गए थे।
2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में एक नया मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदh वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चों या प्रतिपाल्य (ward) के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य बनाया गया।
3. ये मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, तथा ये प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के माध्यम से न्यायालय द्वारा दंडित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दायित्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को किसी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, जिस विषय तक राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता है, और सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामलों में भी राज्यपाल को क्षमादान की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की आयु राज्य विधानसभा के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाती है, और यदि इस बीच राज्य विधानमंडल के दोनों सदन (द्विसदनीय होने पर) अध्यादेश के अस्वीकृत होने का संकल्प पारित कर देते हैं, तो अध्यादेश की अवधि छह सप्ताह की समाप्ति से पहले ही समाप्त हो जाती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन के संचालन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और राज्यपाल द्वारा राज्य के प्रशासन से संबंधित मांगी गई किसी भी सूचना को देने से मुख्यमंत्री इनकार कर सकता है यदि वह मामला गोपनीय श्रेणी के अंतर्गत आता हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से 292 सदस्य ब्रिटिश भारत के प्रांतों से, 4 सदस्य मुख्य कमिश्नर क्षेत्रों से और 93 सदस्य रियासतें (Princely States) से होने थे, और रियासत के सदस्यों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था।
2. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने कुल 208 सीटें जीतीं, जबकि मुस्लिम लीग ने 73 सीटें प्राप्त कीं, और इस चुनाव में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) का प्रयोग किया गया था जिसके आधार पर देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक ने अपने प्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष चुनाव किया था।
3. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया, और सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की परंपरा के अनुसार सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Provisional President) चुना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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