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महात्मा गांधी ने कांग्रेस के किस एकमात्र अधिवेशन की अध्यक्षता की थी?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
महात्मा गांधी ने केवल 1924 के बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
Related Questions
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, भारत में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC) के अंतर्गत शुरू किए गए 'राष्ट्रीय सौर मिशन' (National Solar Mission) तथा सौर ऊर्जा से जुड़ी पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय सौर मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारत में ग्रिड से जुड़ी सौर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना था, और इसके तहत शुरुआत में केवल बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली यूटिलिटी-स्केल ग्रिड परियोजनाओं पर ही ध्यान केंद्रित किया गया था, जबकि रूफटॉप सोलर (छत पर सौर ऊर्जा) को इसके शुरुआती चरणों में पूरी तरह से बाहर रखा गया था।
2. 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA) भारत और फ्रांस द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम, भारत में स्थित है, और इसका मुख्य उद्देश्य कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच पूरी तरह से स्थित देशों को ही सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए एक मंच पर लाना है।
3. भारत सरकार द्वारा शुरू की गई 'पीएम-कुसुम' (PM-KUSUM) योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए डीज़ल और बिजली पर निर्भरता कम करना है, जिसके तहत किसानों की बंजर या कृषि भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना तथा सौर ऊर्जा से संचालित कृषि पंपों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, वर्ष 1929 के 'लाहौर अधिवेशन' और 'पूर्ण स्वराज' के प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाहौर में आयोजित कांग्रेस के इस ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी, और इसी अधिवेशन में पहली बार भारत के लिए 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) को कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य घोषित किया गया था।
2. इस अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 का दिन 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा और पूरे देश में इस दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।
3. कांग्रेस के इस अधिवेशन के तुरंत बाद, महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत करने के लिए अपनी प्रसिद्ध 'ग्यारह सूत्री मांगें' (Eleven Points) वायसराय लॉर्ड इरविन के समक्ष रखीं, जिसके अस्वीकार होने पर दांडी मार्च शुरू किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के गठन, क्षेत्राधिकार और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के प्रभावी तथा त्वरित निपटान के लिए की गई थी।
2. यह अधिकरण अपने निर्णयों या आदेशों की सुनवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (Code of Civil Procedure, 1908) के सख्त नियमों से बंधा नहीं होता है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही अपील दायर की जा सकती है, और इसके आदेशों को उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारिता के अंतर्गत चुनौती नहीं दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा 'परिसीमन आयोग' (Delimitation Commission) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार प्रत्येक जनगणना के पश्चात संसद द्वारा एक विधि के माध्यम से परिसीमन अधिनियम लागू किया जाता है, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करने के लिए राष्ट्रपति के आदेश द्वारा एक स्वतंत्र 'परिसीमन आयोग' का गठन किया जाता है।
2. परिसीमन आयोग एक शक्तिशाली वैधानिक निकाय है, जिसके आदेशों को भारत के किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत (Challenge) किया जा सकता है, और इस आयोग के निर्णयों के विरुद्ध उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की कुल संख्या को वर्ष 2001 तक के लिए स्थिर (Freeze) कर दिया गया था, जिसे बाद में 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा वर्ष 2026 के पश्चात होने वाली पहली जनगणना तक के लिए और बढ़ा दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) की संरचना, स्वतंत्रता और इसकी शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. निर्वाचन आयोग एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय है, जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत की गई है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए किसी विशिष्ट विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. संविधान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की अहर्ताओं (Qualifications) का कोई भी विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, और न ही संविधान द्वारा सेवानिवृत्त होने वाले निर्वाचन आयुक्तों को सरकार द्वारा किसी अन्य नियुक्ति या पद ग्रहण करने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।
3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य किसी भी निर्वाचन आयुक्त को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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