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भारत के संविधान की प्रस्तावना में भारत को कैसा राज्य घोषित किया गया है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
प्रस्तावना में भारत को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित किया गया है।
Related Questions
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1930 के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और उससे जुड़े घटनाक्रमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा प्रसिद्ध 'दांडी मार्च' (Salt March) के साथ की गई थी, जिसके तहत साबरमती आश्रम से दांडी तक की 240 मील की यात्रा कर 6 अप्रैल 1930 को सांकेतिक रूप से नमक कानून तोड़ा गया, तथा इस दौरान चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने तमिलनाडु में वेदारण्यम नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया था।
2. इस आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रतिरोध देखा गया, जिसके तहत उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (Khudai Khidmatgar) नामक संगठन ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिन्हें 'लाल कुर्ती' (Red Shirts) आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण के दौरान ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लार्ड इरविन के साथ हुए 'गांधी-इरविन समझौते' (Gandhi-Irwin Pact) के तहत वर्ष 1931 में लंदन में आयोजित होने वाले तीनों (प्रथम, द्वितीय और तृतीय) गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने की सैद्धांतिक सहमति दी थी और कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने सभी सम्मेलनों में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अटॉनी जनरल ऑफ इंडिया' (भारत के महान्यायवादी - अनुच्छेद 76) तथा 'महाधिवक्ता' (एडवोकेट जनरल - अनुच्छेद 165) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा ऐसे व्यक्ति को की जाती है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्ह (Qualified) हो, और वह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, किंतु महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार होने के बावजूद मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. 'के.के. वेणुगोपाल बनाम भारत संघ' या संवैधानिक विधि से जुड़े अन्य मामलों में यह स्पष्ट किया गया है कि महान्यायवादी और राज्य के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) दोनों ही पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी (Full-time government servants) होते हैं, जिन्हें किसी भी प्रकार का निजी वकालत अभ्यास (Private legal practice) करने की सख्त संवैधानिक और विधिक मनाही होती है।
3. राज्य के महाधिवक्ता (अनुच्छेद 165) को उस राज्य की विधानसभा या विधान परिषद (जहाँ विधान परिषद है) की बैठकों में भाग लेने, बोलने और बिना मतदान के उसकी कार्यवाहियों में हिस्सा लेने का अधिकार होता है, तथा उसे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की समिति का सदस्य भी बनाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किसने नारा दिया था 'वेदों की ओर लौटो'?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से कोई भी धन विधि के प्राधिकार के बिना नहीं निकाला जा सकता है, तथा इस निधि में सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, ऋण और ट्रेजरी बिलों के निर्गमन से प्राप्त धन जमा किए जाते हैं।
2. अनुच्छेद 267 के तहत संसद को विधि द्वारा एक 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) स्थापित करने की शक्ति दी गई है, जो राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है और संसद की पूर्व स्वीकृति के बिना इस निधि से किसी भी अप्रत्याशित व्यय के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है।
3. भारत के प्रत्येक राज्य की अपनी एक संचित निधि होती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 283 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि राज्यों की संचित निधि और लोक लेखा (Public Account) के संबंध में धन की अभिरक्षा, भुगतान और निकासी के लिए नियम केवल संबंधित राज्य का राज्यपाल ही बना सकता है, और इसमें राज्य विधानमंडल की कोई विधाई शक्ति नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अंतर-राज्यीय परिषद' (Inter-State Council - Article 263) तथा केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत 'अंतर-राज्यीय परिषद' की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और यह एक स्थायी सांविधिक निकाय (Statutory Body) है जिसका प्राथमिक कार्य संघ और राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की सुनवाई करना तथा उनके न्यायनिर्णयन पर अंतिम आदेश देना है।
2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के एक आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री करते हैं, तथा इसके स्थायी सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं।
3. 'एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ' या केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े अन्य संवैधानिक मामलों में यह स्पष्ट किया गया है कि अंतर-राज्यीय परिषद द्वारा लिए गए निर्णय या संस्तुतियाँ संघ और राज्यों की सरकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी होती हैं, यदि उन्हें संसद के दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से अनुमोदित कर दिया जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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